- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- चंबा में भूस्खलन का...

चंबा : हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान होने वाले भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं हर साल बड़ी तबाही लेकर आती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बाद जमीन खिसकने की घटनाएं लगातार बढ़ जाती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होता है। इसी कड़ी में जिला चंबा के बलोठ क्षेत्र में स्थित क्रूटू सेरी घार अब ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बन गई है।
बरसात शुरू होते ही इस इलाके में भूस्खलन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहाड़ी से लगातार मलबा गिरने के कारण आसपास रहने वाले लोगों और इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
बरसात के साथ बढ़ा खतरा
मानसून के दस्तक देते ही हिमाचल प्रदेश के कई पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। चंबा जिले के बलोठ इलाके में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। क्रूटू सेरी घार में बारिश के साथ पहाड़ी कमजोर होकर दरकने लगी है।
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में यहां से गुजरना जोखिम भरा हो जाता है। कभी भी पहाड़ी से बड़े पत्थर और मलबा गिरने की आशंका बनी रहती है। इस कारण स्थानीय लोगों को अपनी सुरक्षा की चिंता सताती रहती है।
वर्षों से बनी हुई है समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्रूटू सेरी घार की समस्या कोई नई नहीं है। कई वर्षों से यहां भूस्खलन हो रहा है और हर बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान के लिए कोई बड़ा काम शुरू नहीं किया गया है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
राहगीरों के लिए भी खतरा
क्रूटू सेरी घार केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी खतरा बनी हुई है। पहाड़ी रास्तों पर अचानक मलबा गिरने से किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।
बारिश के दौरान इस मार्ग पर आवाजाही करने वाले लोगों को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा दीवार, मलबा रोकने के इंतजाम और अन्य आवश्यक कदम उठाए जाएं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि भूस्खलन को रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम करने की जरूरत है।
लोगों की मांग है कि विशेषज्ञों की टीम भेजकर क्षेत्र का सर्वे कराया जाए और समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। केवल अस्थायी उपायों से हर साल होने वाले खतरे को कम नहीं किया जा सकता।
हिमाचल में मानसून बनता है चुनौती
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। पिछले वर्षों में भी राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण सड़कें बंद हुईं, मकानों को नुकसान पहुंचा और कई लोगों की जान गई।
पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक स्थिति और लगातार हो रहे निर्माण कार्यों के कारण कई स्थानों पर जमीन कमजोर हो रही है। ऐसे में बारिश के दौरान खतरा और बढ़ जाता है।
सुरक्षा उपायों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन प्रभावित इलाकों की पहचान कर पहले से सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए। ढलानों को मजबूत करने, पानी की निकासी की बेहतर व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने से हादसों को कम किया जा सकता है।
चंबा के बलोठ क्षेत्र में भी इसी तरह के कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान उन्हें डर के माहौल में रहना पड़ता है।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण आसपास के गांवों के लोग चिंतित हैं। लोगों को डर है कि यदि बारिश का दौर तेज हुआ तो स्थिति और खराब हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि किसी बड़ी घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सुरक्षा उपायों में देरी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
फिलहाल बलोठ की क्रूटू सेरी घार में भूस्खलन की समस्या जारी है और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही इस खतरे से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।





