हिमाचल प्रदेश

किन्नौर में मलिंग नाला के पास भूस्खलन, NH-501 बंद, वाहनों की लंबी कतारें

Kavita2
14 May 2026 4:30 PM IST
किन्नौर में मलिंग नाला के पास भूस्खलन, NH-501 बंद, वाहनों की लंबी कतारें
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Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : किन्नौर में एक बार फिर मलिंग नाला क्षेत्र में भारी भूस्खलन की घटना सामने आई है, जिससे पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। पहाड़ी से लगातार भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण राष्ट्रीय उच्च मार्ग-501 पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है।

भूस्खलन के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन घंटों से जाम में फंसे हुए हैं और आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है।

घटना के दौरान पहाड़ी से लगातार मलबा गिरता रहा, जिससे पूरे क्षेत्र में धूल का घना गुबार फैल गया। इससे दृश्यता काफी कम हो गई और सड़क पर आवाजाही बेहद जोखिमभरी हो गई है। स्थिति को देखते हुए कई वाहन चालकों ने अपने वाहन सुरक्षित स्थानों पर रोक दिए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह क्षेत्र पहले से ही भूस्खलन के लिए संवेदनशील माना जाता है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। हर साल मानसून और बदलते मौसम में इस मार्ग पर इसी तरह की समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं।

भूस्खलन के कारण इलाके में दहशत का माहौल भी देखा गया। यात्रियों ने बताया कि अचानक पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरना शुरू हो गया, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वाहन जहां थे वहीं रुक गए।

प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से मार्ग को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया है, हालांकि लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण राहत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।

हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जब तक भूस्खलन पूरी तरह रुक नहीं जाता, तब तक सड़क को सुरक्षित रूप से खोलना मुश्किल होगा।

फिलहाल, यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने या स्थिति सामान्य होने तक इंतजार करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस क्षेत्र में अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन मौसम और पहाड़ी की अस्थिरता के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं।

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