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हिमाचल प्रदेश
कांगड़ा का होटल कारोबार संकट में, 100 से ज्यादा संपत्तियां बिक्री पर
Kiran
5 Oct 2026 2:35 PM IST

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Kangra district कांगड़ा ज़िले का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर गंभीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है। यहाँ 100 से ज़्यादा होटल और टूरिज़्म प्रॉपर्टीज़ बिक्री के लिए उपलब्ध हैं क्योंकि मालिक ऊँची ब्याज दरों, कम पर्यटकों के आने और टैक्स व कानूनी शुल्कों के बढ़ते बोझ के बीच बैंक लोन चुकाने में संघर्ष कर रहे हैं। होटल चलाने वालों का कहना है कि स्थिति ऐसी हो गई है कि कई मालिकों के लिए हर महीने लोन की किस्तें और ऑपरेशनल खर्च चुकाना मुश्किल होता जा रहा है। कई प्रॉपर्टीज़, जिन्हें कभी टूरिज़्म में मुनाफ़े वाला निवेश माना जाता था, अब बाज़ार में बेची जा रही हैं क्योंकि मालिक ऐसे बिज़नेस से बाहर निकलना चाहते हैं जो आर्थिक रूप से फ़ायदेमंद नहीं रहे।
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख टूरिज़्म हब होने के बावजूद - जहाँ धर्मशाला, मैकलॉडगंज, बीर-बिलिंग, पालमपुर और बैजनाथ जैसे डेस्टिनेशन साल भर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं - होटलों में पर्यटकों के ठहरने की दर (ऑक्यूपेंसी लेवल) इतनी नहीं रही है कि भारी कर्ज़ वाली प्रॉपर्टीज़ को बनाए रखा जा सके। होटल मालिकों का कहना है कि लोन लेने की बढ़ती लागत ने उनके आर्थिक बोझ को काफ़ी बढ़ा दिया है। होटलों के निर्माण या विस्तार के लिए लिए गए लोन को चुकाना मुश्किल हो गया है, जबकि आमदनी उस रफ़्तार से नहीं बढ़ी है। उनका तर्क है कि कई तरह के टैक्स, फ़ीस और अन्य कानूनी शुल्कों ने पहले से ही कम ऑपरेटिंग मार्जिन को और कम कर दिया है।
इस संकट ने होटल प्रॉपर्टीज़ को लीज़ पर देने के विकल्प को भी कमज़ोर कर दिया है। कुछ मालिकों ने अपने होटल ऑपरेटरों को लीज़ पर देकर आर्थिक बोझ कम करने की कोशिश की। हालाँकि, इंडस्ट्री के सूत्रों का दावा है कि ऐसी कई व्यवस्थाएँ समय से पहले ही खत्म हो गईं, क्योंकि लीज़ लेने वालों ने तय कॉन्ट्रैक्ट की अवधि पूरी होने से पहले ही प्रॉपर्टीज़ छोड़ दीं। लीज़ एग्रीमेंट के समय से पहले खत्म होने से प्रॉपर्टी मालिकों के लिए नई चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं, और विवादों के कारण कानूनी मामले और लंबी कानूनी लड़ाइयाँ बढ़ रही हैं। होटल फ़ॉर्च्यून पार्क के मालिक अर्चित बुटेल ने बिगड़ती स्थिति पर राज्य सरकार की अपर्याप्त प्रतिक्रिया पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को अलग-अलग उपायों के बजाय एक व्यापक राहत और रिवाइवल पैकेज की ज़रूरत है, खासकर उन प्रॉपर्टीज़ के लिए जो कर्ज़ चुकाने और घटते बिज़नेस से जूझ रही हैं।
उन्होंने कहा, "अगर इस संकट को और गहरा होने दिया गया, तो इसके असर सिर्फ़ होटल मालिकों तक ही सीमित नहीं रहेंगे। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर हज़ारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार देता है और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, रेस्तरां, स्थानीय व्यापारियों, गाइडों, टैक्सी ऑपरेटरों और छोटे व्यवसायों के एक बड़े नेटवर्क को सहारा देता है।" बीर-बिलिंग में होटल चलाने वाले अंकित सूद ने कहा कि सरकार को कांगड़ा में मुश्किलों का सामना कर रही टूरिज़्म प्रॉपर्टीज़ की संख्या का तुरंत आकलन करना चाहिए, टैक्स और लोन की लागत के आर्थिक असर को समझना चाहिए, और बैंकों व वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर उन्हें फिर से व्यवस्थित करने के व्यावहारिक तरीके खोजने चाहिए।
खबरों के अनुसार, और भी होटल प्रॉपर्टीज़ बिक्री के लिए रखी जा रही हैं। ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि क्या कांगड़ा का टूरिज़्म इंफ्रास्ट्रक्चर बिना किसी ठोस और समन्वित पहल के टिका रह पाएगा? ऐसी पहल, जो आर्थिक रूप से मुश्किल में फंसी संपत्तियों को बिकने से बचा सके या उन्हें लंबे कानूनी विवादों में फंसने से रोक सके।
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