हिमाचल प्रदेश

विकास कार्यों में देरी पर भड़कीं कंगना बोलीं गड़बड़ी करने वालों को करें ब्लैकलिस्ट

Kavita2
5 Sept 2026 2:23 PM IST
विकास कार्यों में देरी पर भड़कीं कंगना बोलीं गड़बड़ी करने वालों को करें ब्लैकलिस्ट
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला मुख्यालय स्थित उपायुक्त कार्यालय सभागार में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत विकास कार्यों में देरी और सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर सख्त नजर आईं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता के विकास के लिए जारी धन लेकर काम नहीं करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और गड़बड़ी करने वालों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए।

बैठक के दौरान सांसद कंगना रनौत ने सांसद निधि से स्वीकृत विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि धन आवंटित होने के बावजूद कई काम लंबे समय से पूरे नहीं हुए हैं। कुछ मामलों में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए बिना राशि जारी कराने और बाद में काम नहीं करने जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए।

30 से 40 प्रतिशत पैसा फंसा होने का दावा

कंगना रनौत ने बैठक में दावा किया कि सांसद निधि से जुड़ा लगभग 30 से 40 प्रतिशत पैसा गलत लोगों के पास फंसा हुआ है।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर राशि हासिल करने के बाद भी कई लोग वर्षों तक काम शुरू नहीं करते। इससे एक तरफ विकास परियोजनाएं अधूरी रहती हैं तो दूसरी तरफ जनता के लिए उपलब्ध धन भी लंबे समय तक उपयोग में नहीं आ पाता।

सांसद ने कहा कि ऐसी व्यवस्था को अब जारी नहीं रहने दिया जा सकता।

बिना NOC और जमीन की औपचारिकता पूरी किए राशि लेने का आरोप

कंगना ने कहा कि कुछ लोग विकास कार्यों के लिए जरूरी NOC और जमीन से संबंधित औपचारिकताएं पूरी किए बिना ही राशि हासिल कर लेते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में भाईचारे या आपसी सहमति के आधार पर पांच-दस लोगों के हस्ताक्षर कराकर प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया जाता है। इसके बाद धनराशि तो ले ली जाती है, लेकिन जमीन और अन्य औपचारिकताओं से संबंधित विवाद के कारण काम वर्षों तक शुरू नहीं होता।

इससे सरकारी धन फंस जाता है और जिस उद्देश्य के लिए राशि स्वीकृत की गई थी वह पूरा नहीं हो पाता।

जनता के पैसे पर कुंडली मारकर बैठने वालों पर सख्ती

बैठक में सांसद ने दो टूक कहा कि जनता के पैसे पर कुंडली मारकर बैठने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से कहा कि जिन लोगों या संस्थाओं ने सरकारी धन लिया है लेकिन निर्धारित समय में काम नहीं किया, उनके मामलों की समीक्षा की जाए।

यदि जांच में जानबूझकर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों को भविष्य में सरकारी विकास कार्यों से दूर रखने के लिए ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जाए।

ब्लैकलिस्ट करने के दिए निर्देश

कंगना रनौत ने अधिकारियों से कहा कि बार-बार गड़बड़ी करने वाले या पैसा लेकर काम नहीं करने वाले तत्वों के खिलाफ केवल चेतावनी पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने ऐसे लोगों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट करने की बात कही ताकि भविष्य में वे सांसद निधि या अन्य सरकारी योजनाओं के तहत विकास कार्यों के लिए धन हासिल न कर सकें।

सांसद का कहना था कि सरकारी पैसा जनता का पैसा है और इसके इस्तेमाल में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सख्त नियम बनाने पर जोर

सांसद ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सांसद निधि के तहत धन जारी करने से पहले जरूरी दस्तावेज और जमीन संबंधी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव आने के साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिस जमीन पर विकास कार्य प्रस्तावित है, वहां किसी तरह का विवाद न हो और आवश्यक अनुमति पहले से उपलब्ध हो।

इससे धन जारी होने के बाद परियोजना के रुकने की संभावना कम होगी।

कानूनी प्रक्रिया तय करने की मांग

कंगना ने केवल प्रशासनिक नियमों तक सीमित रहने के बजाय कानूनी प्रक्रिया तय करने की भी बात कही।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था राशि लेने के बाद जानबूझकर काम नहीं करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए।

ऐसी व्यवस्था से सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने और समय पर विकास कार्य पूरा कराने में मदद मिल सकती है।

लंबित कार्यों की समीक्षा

दिशा की बैठक में जिले में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

सांसद निधि के तहत स्वीकृत कामों में देरी का मुद्दा बैठक में प्रमुखता से सामने आया। सांसद ने अधिकारियों से लंबित परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट करने और जहां काम रुका है वहां उसकी वजह का पता लगाने को कहा।

उन्होंने कहा कि राशि उपलब्ध होने के बावजूद परियोजना का वर्षों तक लंबित रहना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जवाबदेही तय करने पर जोर

कंगना रनौत ने विकास कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उनका कहना था कि यदि किसी परियोजना के लिए सार्वजनिक धन जारी किया गया है तो उसकी प्रगति की नियमित निगरानी भी जरूरी है।

केवल राशि स्वीकृत करने से विकास नहीं होता। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि परियोजना समय पर शुरू हो, निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी हो और जनता को उसका लाभ मिले।

सांसद निधि के कामों की निगरानी बढ़ाने के संकेत

बैठक में सांसद के सख्त रुख से संकेत मिला कि MPLADS के तहत स्वीकृत विकास कार्यों की निगरानी और कड़ी की जा सकती है।

राशि जारी होने के बाद काम की वास्तविक स्थिति, जमीन की उपलब्धता और निर्माण की प्रगति की नियमित समीक्षा किए जाने पर जोर दिया गया।

इससे ऐसे मामलों की पहचान जल्दी हो सकती है जिनमें धन जारी होने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ रहा हो।

सरकारी धन का सही इस्तेमाल जरूरी

सांसद ने कहा कि सरकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध धन का उद्देश्य आम लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यदि पैसा किसी व्यक्ति या संस्था के पास वर्षों तक पड़ा रहता है तो इसका सीधा नुकसान जनता को होता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, सामुदायिक भवन, पेयजल, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े छोटे विकास कार्यों के लिए सांसद निधि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऐसे में स्वीकृत परियोजनाओं का समय पर पूरा होना जरूरी है।

प्रशासन को स्पष्ट संदेश

दिशा की बैठक के दौरान कंगना रनौत ने जिला प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में लापरवाही और कथित फर्जीवाड़े को गंभीरता से लिया जाए।

उन्होंने जरूरी NOC और जमीन की स्थिति की जांच किए बिना राशि जारी करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए और भविष्य में इसके लिए मजबूत प्रक्रिया बनाने को कहा।

सांसद ने यह भी निर्देश दिया कि पुराने लंबित मामलों की पहचान कर उनमें जिम्मेदारी तय की जाए।

अब लंबित परियोजनाओं पर रहेगी नजर

कंगना रनौत के सख्त निर्देशों के बाद अब नजर मंडी में सांसद निधि से चल रहे लंबित विकास कार्यों पर रहेगी। प्रशासन को यह पता लगाना होगा कि कितनी परियोजनाएं धन जारी होने के बावजूद अधूरी हैं और उनके पूरा न होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।

बैठक में सांसद ने साफ कर दिया कि जनता के विकास के लिए जारी धन का दुरुपयोग या उसे वर्षों तक रोककर रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सख्त नियम, कानूनी प्रक्रिया और ब्लैकलिस्टिंग की व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने को कहा है।

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