हिमाचल प्रदेश

बृहस्पति अस्त: मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, ज्योतिष में क्या है मान्यता

Saba Naaz
14 July 2026 3:49 PM IST
बृहस्पति अस्त: मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, ज्योतिष में क्या है मान्यता
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ऊना। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने के कारण आने वाले दिनों में कई शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। मान्यता है कि 15 जुलाई से देवगुरु बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और करीब 25 दिनों तक विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों का आयोजन नहीं किया जाएगा। सनातन परंपरा में बृहस्पति ग्रह को ज्ञान, धर्म, शुभता और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार गुरु के अस्त रहने की अवधि में मांगलिक कार्यों को करना शुभ नहीं माना जाता।

15 जुलाई शाम को अस्त होंगे गुरु

हिमाचल प्रदेश के ऊना स्थित सिद्धिदात्री मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शशि भूषण के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति 15 जुलाई को बुधवार शाम 7 बजकर 27 मिनट पर अस्त होंगे। इसके बाद वह करीब 25 दिनों तक अस्त अवस्था में रहेंगे और 9 अगस्त को रात 9 बजकर 54 मिनट पर उदय होंगे। गुरु के उदय होने के बाद ही दोबारा विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त की शुरुआत मानी जाएगी।

विवाह जैसे कार्यों पर रहेगा विराम

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरु और शुक्र ग्रह को विवाह और शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। उत्तर भारत में मान्यता है कि जब देवगुरु बृहस्पति या शुक्र अस्त होते हैं तो विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को टालना उचित माना जाता है। पंडित शशि भूषण ने बताया कि बृहस्पति और शुक्र दोनों ग्रह एक साथ अस्त नहीं होते, लेकिन इनमें से किसी एक ग्रह के अस्त होने पर भी विवाह जैसे शुभ कार्यों को करना ज्योतिषीय दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इस अवधि में शादी-विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार और अन्य शुभ आयोजन नहीं किए जाते हैं।

कौन से कार्य किए जा सकेंगे?

हालांकि, गुरु अस्त की अवधि में सभी धार्मिक और दैनिक कार्यों पर रोक नहीं होती। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दौरान नियमित पूजा-पाठ, भगवान की आराधना, मंत्र जाप, दान-पुण्य और ग्रह शांति से जुड़े कार्य किए जा सकते हैं। इसके अलावा पहले से चल रहे कार्य, सामान्य दिनचर्या और जरूरी गतिविधियां जारी रह सकती हैं। नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए ज्योतिषीय सलाह लेने की परंपरा है।

गुरु ग्रह का ज्योतिष में विशेष महत्व

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा गया है। इसे ज्ञान, शिक्षा, धर्म, संतान सुख और विवाह का कारक ग्रह माना जाता है। कुंडली में गुरु की स्थिति व्यक्ति के जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रभावित करने वाली मानी जाती है। इसी कारण जब गुरु अस्त होते हैं तो ज्योतिष में उनकी शुभ प्रभाव क्षमता कम मानी जाती है और इस दौरान बड़े मांगलिक निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

25 दिन बाद फिर शुरू होंगे शुभ कार्य

देवगुरु बृहस्पति के उदय होने के बाद शुभ कार्यों के लिए दोबारा मुहूर्त निकलने शुरू होंगे। ऐसे में जिन परिवारों ने विवाह या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की योजना बनाई है, उन्हें 9 अगस्त के बाद शुभ तिथियों का इंतजार करना होगा।

हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताएं धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में इनका पालन अलग तरीके से किया जाता है। कई लोग शुभ कार्यों के लिए अपने पंडित या ज्योतिषाचार्य से सलाह लेकर निर्णय लेते हैं।

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