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कांगड़ा। जब खेती में बढ़ती लागत, जमीन की कमी और आमदनी की अनिश्चितता के कारण कई किसान कृषि से दूरी बना रहे हैं, ऐसे समय में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के जवाली क्षेत्र के किसान जीवन राणा ने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने साबित किया है कि सही जानकारी, मेहनत और आधुनिक सोच के साथ खेती आज भी लाभदायक और टिकाऊ व्यवसाय बन सकती है।
जवाली सब-डिविजन के घर जरोट निवासी जीवन राणा ने पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर एक ऐसा बाग तैयार किया है, जो किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। उनका यह प्रयास दिखाता है कि पारंपरिक खेती को नई तकनीक और प्राकृतिक तरीकों के साथ जोड़कर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
जीवन राणा पेशे से रिटायर्ड स्कूल लेक्चरर हैं। वह पोंग डैम विस्थापित परिवार से आते हैं और उनका मूल संबंध जवाली के सिधाथा गांव से है। नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने आराम की जिंदगी चुनने के बजाय अपने पुश्तैनी खेतों की ओर लौटने का फैसला किया।
राणा ने नगरोटा सूरियां के पास घर जरोट में स्थित अपने खेतों को फिर से विकसित करने का बीड़ा उठाया। उनका उद्देश्य केवल खेती करना नहीं था, बल्कि उस प्राकृतिक कृषि परंपरा को दोबारा जीवित करना था, जिसे उनके पूर्वज वर्षों से अपनाते आए थे।
उन्होंने खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए प्राकृतिक तरीकों को अपनाया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट का बाग विकसित किया। आज उनका बाग हरे-भरे पौधों से भरा हुआ है और प्राकृतिक खेती की सफलता की कहानी कह रहा है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती को हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में एक उभरते विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यह फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है और बाजार में इसकी मांग भी बढ़ रही है। जीवन राणा ने इसी संभावना को पहचाना और इसे अपने खेतों में सफलतापूर्वक अपनाया।
उनके बाग में केवल ड्रैगन फ्रूट ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक तरीके से उगाई गई दालें और मौसम के अनुसार विभिन्न सब्जियां भी तैयार की जाती हैं। वह खेती को केवल आय का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का जरिया मानते हैं।
राणा बताते हैं कि खेती में सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज धैर्य और सीखने की इच्छा है। उन्होंने नई फसलों, प्राकृतिक खेती के तरीकों और बाजार की मांग को समझते हुए धीरे-धीरे अपने खेतों में बदलाव किए।
उनके इस प्रयास में परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। परिवार के सहयोग और सामूहिक मेहनत से उन्होंने बंजर होती जा रही कृषि भूमि को फिर से उपजाऊ और उत्पादक बनाया।
जीवन राणा की कहानी उन किसानों के लिए उम्मीद की किरण है, जो खेती को घाटे का सौदा मानकर इससे दूर हो रहे हैं। उनका मानना है कि यदि किसान सही फसल का चुनाव करें, प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं और बाजार की जरूरतों को समझें, तो खेती से अच्छी आय हासिल की जा सकती है।
आज उनका ड्रैगन फ्रूट का बाग न केवल आर्थिक रूप से लाभ दे रहा है, बल्कि आसपास के किसानों को भी नई राह दिखा रहा है। कई लोग उनके खेतों को देखने पहुंचते हैं और प्राकृतिक खेती के तरीकों की जानकारी लेते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि बदलते समय में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई फसलों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की जरूरत है। ड्रैगन फ्रूट जैसी वैकल्पिक फसलें किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
जीवन राणा का प्रयास यह साबित करता है कि उम्र या परिस्थितियां खेती में नई शुरुआत के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। उन्होंने रिटायरमेंट के बाद अपने अनुभव और मेहनत को खेती से जोड़कर एक सफल मॉडल तैयार किया है।
उनका प्राकृतिक ड्रैगन फ्रूट बागान आज इस बात का उदाहरण है कि यदि खेती को जुनून, ज्ञान और सही तकनीक के साथ किया जाए तो यह न केवल टिकाऊ हो सकती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।
जीवन राणा ने अपनी मेहनत से यह संदेश दिया है कि खेती केवल पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य का एक मजबूत और सम्मानजनक विकल्प भी हो सकती है।





