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शिमला में JDA विवाद गहराया, धारा 118 और रेरा मंजूरियों पर उठे सवाल

Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में धारा 118 से जुड़े संयुक्त विकास समझौते (ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट–JDA) अब बड़े प्रशासनिक और कानूनी विवाद का रूप लेते जा रहे हैं। राजस्व विभाग द्वारा उठाए गए सवालों के बाद मामला राज्य सरकार के आवास विभाग तक पहुंच गया है, जहां से अब इसकी जांच और कानूनी राय लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार के आवास विभाग ने राज्य विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) की ओर से दी गई मंजूरियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर विस्तृत कानूनी राय मांगी है। इस कदम के बाद पूरे मामले ने प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है।
रेरा की मंजूरियों को लेकर उठे सवालों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। साथ ही धारा 118 के कथित उल्लंघन को लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। इस पूरे मामले को लेकर सचिवालय से लेकर रेरा और राजस्व विभाग तक हलचल देखी जा रही है।
सरकार को आशंका है कि राज्य में कई रियल एस्टेट परियोजनाओं में ऐसे ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट को मंजूरी दी गई है, जो हिमाचल प्रदेश भू-स्वामित्व एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 की भावना के अनुरूप नहीं हो सकते। यह धारा राज्य में भूमि खरीद-बिक्री और उपयोग से जुड़े नियमों को नियंत्रित करती है, विशेषकर बाहरी व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा भूमि उपयोग के मामलों में।
सूत्रों के अनुसार, कुछ परियोजनाओं में रेरा की मंजूरी और राजस्व विभाग की प्रक्रिया के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यही कारण है कि सरकार अब सभी संबंधित मामलों की कानूनी जांच करवाने पर विचार कर रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या प्रक्रिया उल्लंघन की पुष्टि की जा सके।
प्रशासनिक स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि क्या रेरा द्वारा दी गई मंजूरियां धारा 118 के प्रावधानों के अनुरूप थीं या नहीं। इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विजिलेंस विभाग से राय मिलने के बाद सरकार इस मामले में आगे का निर्णय ले सकती है।
इस पूरे विवाद के कारण राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में भी अनिश्चितता का माहौल बन गया है। कई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की वैधता और मंजूरी प्रक्रिया को लेकर अब नए सिरे से समीक्षा की आशंका जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, शिमला में जेडीए और रेरा मंजूरियों को लेकर उठा यह विवाद अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह कानूनी जांच के दायरे में आ चुका है, जिससे आने वाले दिनों में राज्य की भूमि और विकास नीतियों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।





