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मंडी। जिंदगी में मुश्किल हालात आने के बाद भी यदि हौसला मजबूत हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। मंडी जिले के नागचला गांव के 25 वर्षीय जतिन ने अपने संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह साबित कर दिया है। बचपन में हादसे में दोनों हाथ गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद युवावस्था में ड्रग की लत ने उनकी जिंदगी को बर्बादी की ओर धकेल दिया, लेकिन उन्होंने नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ी और खुद को इस दलदल से बाहर निकाल लिया।
आज जतिन न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल चुके हैं, बल्कि वह कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। उनके अभियान से जुड़कर अब तक 30 युवाओं ने ड्रग्स का सेवन छोड़ दिया है। इनमें उनके 11 करीबी दोस्त भी शामिल हैं, जिन्होंने जतिन की प्रेरणा से नशे की आदत को अलविदा कह दिया।
जतिन की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। महज छह वर्ष की उम्र में एक हादसे में उन्हें करंट लग गया था। इस दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए। बचपन में ही शारीरिक परेशानी का सामना करने के बावजूद जतिन ने आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखी। परिवार और परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और सामान्य जीवन जीने का प्रयास किया।
हालांकि, कॉलेज के दिनों में वह गलत संगत में पड़ गए और धीरे-धीरे ड्रग्स की लत का शिकार हो गए। नशे की आदत ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। शारीरिक चुनौती के साथ-साथ नशे ने उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से भी कमजोर कर दिया। एक समय ऐसा आया जब उन्हें महसूस हुआ कि यदि उन्होंने खुद को नहीं बदला तो उनका भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
इसके बाद जतिन ने अपनी जिंदगी को नई दिशा देने का फैसला किया। उन्होंने मजबूत इच्छाशक्ति के साथ नशे को छोड़ने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उन्होंने ड्रग्स की लत से खुद को मुक्त किया और एक नई शुरुआत की। आज वह अपने अतीत को कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत मानते हैं।
जतिन का कहना है कि नशे से बाहर निकलने के बाद उन्हें जीवन का नया अर्थ मिला। इसी वजह से वह उस दिन को अपना पुनर्जन्म मानते हैं, जिस दिन उन्होंने नशे को छोड़ने का फैसला किया था। वह हर साल उसी तारीख को अपनी पुनर्जन्म तिथि के रूप में मनाते हैं।
11 अगस्त को जतिन ने अपनी चौथी पुनर्जन्म तिथि मनाई। इस मौके पर उन्होंने अपने संघर्ष को याद किया और नशे से दूर हुए युवाओं के साथ अपनी नई जिंदगी का जश्न मनाया। उनके लिए यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि नई सोच और नई शुरुआत का प्रतीक है।
जतिन अब अपने अभियान के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक कर रहे हैं। वह स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में जाकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों को नुकसान पहुंचाता है।
उनके प्रयासों से प्रभावित होकर कई युवाओं ने अपनी जिंदगी बदलने का फैसला किया है। जो युवा कभी नशे की गिरफ्त में थे, वे अब दूसरों को इससे बचाने के लिए जतिन के साथ काम कर रहे हैं। यही वजह है कि जतिन का अभियान लगातार मजबूत होता जा रहा है।
जतिन अब नागचला गांव में ही एक नशा निवारण केंद्र खोलने की तैयारी कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि जो युवा नशे की चपेट में आ चुके हैं, उन्हें सही मार्गदर्शन और सहायता मिल सके। वह चाहते हैं कि कोई भी युवा नशे के कारण अपना भविष्य बर्बाद न करे।
जतिन की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों से हार मान लेते हैं। उन्होंने शारीरिक कमजोरी और नशे जैसी दो बड़ी चुनौतियों को हराकर यह साबित किया कि बदलाव की शुरुआत खुद से की जा सकती है।
आज जतिन न केवल अपने जीवन को बेहतर बना चुके हैं, बल्कि समाज के लिए भी सकारात्मक बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। उनका संघर्ष और सेवा भाव युवाओं को यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी मुश्किल स्थायी नहीं होती।





