हिमाचल प्रदेश

20 साल बाद फिर तिब्बती भाषा सीखेंगे ITBP जवान धर्मशाला में ट्रेनिंग शुरू

Ratna Netam
5 Oct 2026 2:55 PM IST
20 साल बाद फिर तिब्बती भाषा सीखेंगे ITBP जवान धर्मशाला में ट्रेनिंग शुरू
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धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के 15 से अधिक जवान इन दिनों तीन महीने के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत तिब्बती भाषा सीख रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों को स्थानीय लोगों के साथ बेहतर संवाद करने में मदद करना और तिब्बती संस्कृति को समझने के लिए उन्हें बुनियादी भाषा ज्ञान देना है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम लाइब्रेरी ऑफ तिब्बतन वर्क्स एंड आर्काइव्स (LTWA) की शैक्षणिक मदद से संचालित किया जा रहा है।
यह विशेष कार्यक्रम 28 सितंबर को शुरू हुआ है और इसकी अवधि करीब तीन महीने रखी गई है। इस पहल को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद ITBP के जवानों के लिए इस तरह का तिब्बती भाषा प्रशिक्षण फिर से शुरू हुआ है। सीमा क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों के लिए स्थानीय भाषा की जानकारी संवाद और संपर्क को आसान बनाने में मदद कर सकती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जवानों को तिब्बती भाषा की बुनियादी जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान जवानों को तिब्बती भाषा के तीन प्रमुख पक्षों पर जानकारी दी जाएगी। इसमें पढ़ना, लिखना और बोलना शामिल है। यानी प्रशिक्षण केवल बोलचाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवानों को भाषा को समझने और उसके लिखित रूप से परिचित कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे उन्हें स्थानीय लोगों के साथ बातचीत के दौरान सामान्य शब्दों और वाक्यों को समझने में आसानी हो सकती है।
लाइब्रेरी ऑफ तिब्बतन वर्क्स एंड आर्काइव्स के निदेशक गेशे लखदोर ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले ITBP के महानिदेशक ने संस्थान से संपर्क किया था। इसके बाद जवानों को बुनियादी तिब्बती भाषा सिखाने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। संस्थान की ओर से प्रशिक्षण के लिए शिक्षण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
गेशे लखदोर के मुताबिक, ITBP की ओर से विशेष रूप से ऐसी भाषा शिक्षा की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे सीमा क्षेत्र में तैनात जवान स्थानीय आबादी के साथ संवाद स्थापित कर सकें। प्रशिक्षण के जरिए जवानों को तिब्बती भाषा की बुनियादी समझ देने की कोशिश की जा रही है, ताकि स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान भाषा एक बड़ी बाधा न बने।
सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की भूमिका केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती। जवानों का स्थानीय आबादी के साथ नियमित संपर्क भी होता है। ऐसे में क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा की जानकारी होने से सामान्य बातचीत, स्थानीय परिस्थितियों को समझने और लोगों से संवाद स्थापित करने में मदद मिल सकती है। तिब्बती भाषा का प्रशिक्षण इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस कार्यक्रम का एक और पहलू तिब्बती संस्कृति की समझ से जुड़ा हुआ है। भाषा किसी भी समाज की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक व्यवहार को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। इसलिए जवानों को तिब्बती भाषा का बुनियादी ज्ञान देने के साथ स्थानीय संस्कृति को समझने की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे सीमा क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के साथ संपर्क को अधिक सहज बनाने में मदद मिल सकती है।
धर्मशाला में स्थित LTWA लंबे समय से तिब्बती भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े अध्ययन और संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था के रूप में सक्रिय है। ऐसे संस्थान की शिक्षण सहायता से ITBP के जवानों को भाषा सीखने का अवसर मिलना इस कार्यक्रम को विशेष बनाता है। जवानों को नियमित कक्षाओं और शिक्षण सामग्री के माध्यम से भाषा के मूलभूत पहलुओं से परिचित कराया जा रहा है।
बताया गया है कि यह पहल करीब 20 साल के अंतराल के बाद दोबारा शुरू हुई है। इतने लंबे समय बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम की वापसी यह दर्शाती है कि सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए स्थानीय भाषा के ज्ञान को फिर से उपयोगी माना जा रहा है। इस तरह के प्रशिक्षण से सुरक्षा बलों की पेशेवर क्षमताओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संवाद कौशल को भी मजबूती मिल सकती है।
ITBP मुख्य रूप से भारत-चीन सीमा के संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में तैनात रहती है। ऐसे क्षेत्रों में जवानों को अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। स्थानीय भाषा की जानकारी उनके रोजमर्रा के काम में उपयोगी हो सकती है, खासकर तब जब उन्हें सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सीधे संपर्क करना हो।
तीन महीने का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जवानों को तिब्बती भाषा की बुनियादी समझ देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस दौरान पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता पर काम किया जाएगा। कार्यक्रम पूरा होने के बाद जवानों के पास तिब्बती भाषा के सामान्य प्रयोग से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी होगी, जिसका उपयोग वे अपने कार्यक्षेत्र में स्थानीय लोगों के साथ संवाद के दौरान कर सकते हैं।
फिलहाल ITBP के 15 से अधिक जवान इस प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं। आगे इस तरह के कार्यक्रम का विस्तार होता है या नहीं, यह संबंधित संस्थानों और सुरक्षा बलों के फैसले पर निर्भर करेगा। लेकिन मौजूदा पहल यह जरूर बताती है कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ स्थानीय समाज और संस्कृति की समझ को भी महत्व दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, धर्मशाला में ITBP जवानों के लिए शुरू किया गया तिब्बती भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक पहल है। लगभग दो दशक बाद शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत जवानों को तिब्बती भाषा पढ़ने, लिखने और बोलने की बुनियादी शिक्षा दी जा रही है। LTWA की शिक्षण सहायता से चल रही यह पहल सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए भाषा और सांस्कृतिक समझ विकसित करने की कोशिश के तौर पर सामने आई है।
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