हिमाचल प्रदेश

रेस्टोरेंट में एनालाग पनीर की जानकारी देना जरूरी

Kavita2
29 July 2026 11:18 AM IST
रेस्टोरेंट में एनालाग पनीर की जानकारी देना जरूरी
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हिमाचल : रेस्टोरेंट, होटल और फास्ट फूड प्रतिष्ठानों में पनीर से बने व्यंजन पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। अब ग्राहकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनकी प्लेट में परोसा गया पनीर वास्तव में दूध से तैयार किया गया है या फिर वनस्पति वसा और अन्य सामग्री से बना एनालाग पनीर है। हिमाचल प्रदेश खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य कारोबारियों के लिए नए निर्देश जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी प्रतिष्ठान में एनालाग पनीर या चीज का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसकी जानकारी ग्राहकों से छिपाई नहीं जा सकेगी।

विभाग के निर्देशों के अनुसार, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरर्स और फास्ट फूड संचालकों को अपने मेन्यू कार्ड, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर स्पष्ट रूप से बताना होगा कि किसी व्यंजन में एनालाग पनीर या एनालाग चीज का उपयोग किया गया है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें अपनी पसंद के अनुसार भोजन चुनने का अधिकार देना है।

खाद्य सुरक्षा को लेकर विभाग की सख्ती

बरसात के मौसम में खाद्य पदार्थों में खराबी, मिलावट और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। विभाग का कहना है कि इस मौसम में नमी और तापमान में बदलाव के कारण खाद्य सामग्री जल्दी खराब हो सकती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

इसी क्रम में खाद्य एवं सुरक्षा कार्यालय ने जिला ऊना में विभिन्न व्यापार मंडलों को निर्देश जारी किए हैं। व्यापार मंडलों से कहा गया है कि वे होटल संचालकों, रेस्टोरेंट मालिकों, ढाबा संचालकों और अन्य खाद्य कारोबारियों तक विभाग के निर्देश पहुंचाएं और नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं।

क्या होता है एनालाग पनीर?

एनालाग पनीर ऐसा उत्पाद होता है जो पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग होता है। इसे तैयार करने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, तेल, स्टार्च, प्रोटीन और अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उपयोग कई बार लागत कम करने और उत्पाद की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।

दिखने और स्वाद में यह सामान्य पनीर जैसा लग सकता है, जिसके कारण ग्राहक कई बार इसकी पहचान नहीं कर पाते। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग का मानना है कि ग्राहक को यह जानने का अधिकार है कि उसे जो उत्पाद परोसा जा रहा है, वह असली डेयरी पनीर है या एनालाग उत्पाद।

ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ की सही जानकारी देना कारोबारी की जिम्मेदारी है। ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि वह जिस भोजन के लिए भुगतान कर रहा है, उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री क्या है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आज के समय में लोग स्वास्थ्य, पोषण और खाद्य गुणवत्ता को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की सही जानकारी मिलने से ग्राहक बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

नए निर्देशों के बाद यदि कोई रेस्टोरेंट या अन्य खाद्य प्रतिष्ठान एनालाग पनीर का इस्तेमाल करता है और इसकी जानकारी मेन्यू या बिल में नहीं देता है, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

कारोबारियों को दिए गए निर्देश

विभाग ने खाद्य कारोबारियों से कहा है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में पारदर्शिता बनाए रखें। यदि किसी व्यंजन में एनालाग पनीर या चीज का प्रयोग किया जाता है, तो उसे साफ शब्दों में प्रदर्शित किया जाए।

इसके अलावा खाद्य पदार्थों के रखरखाव, साफ-सफाई और गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। रसोईघर की स्वच्छता, कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों को अलग रखने तथा निर्धारित तापमान पर सामग्री के भंडारण जैसे नियमों का पालन करने को कहा गया है।

मिलावट रोकने के लिए बढ़ाई जा रही निगरानी

खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर बाजारों, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच करता है। जांच के दौरान खाद्य नमूने लिए जाते हैं और उन्हें प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाता है। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पादों और नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

विभाग का कहना है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि खाद्य कारोबारियों और उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

ग्राहकों को मिलेगा सही विकल्प

पनीर टिक्का, पनीर बटर मसाला, सैंडविच, पिज्जा और अन्य व्यंजनों में पनीर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में एनालाग पनीर की जानकारी सार्वजनिक करना ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश खाद्य सुरक्षा विभाग की यह पहल खाद्य क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे जहां ग्राहकों को अपने भोजन के बारे में सही जानकारी मिलेगी, वहीं खाद्य कारोबारियों को भी गुणवत्ता और नियमों के पालन के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाया जा सकेगा।

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