हिमाचल प्रदेश

पूर्व सैनिकों के साथ संवाद, लेफ्टिनेंट जनरल लखेरा Palampur में करेंगे वार्ता

Payal
24 April 2026 2:51 PM IST
पूर्व सैनिकों के साथ संवाद, लेफ्टिनेंट जनरल लखेरा Palampur में करेंगे वार्ता
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल लखेरा आगामी सप्ताह पालमपुर में असम राइफल्स के पूर्व सैनिकों से बातचीत करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य सेना और पूर्व सैनिकों के बीच मजबूत संवाद स्थापित करना और उनके अनुभव, सुझाव तथा समस्याओं को सुनना है।
सेना सूत्रों ने बताया कि यह बैठक पूर्व सैनिकों के कल्याण, सामाजिक पुनर्वास और उनकी सेवाओं के अनुभव को साझा करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। लेफ्टिनेंट जनरल लखेरा इस अवसर पर असम राइफल्स के पूर्व सैनिकों के साथ उनकी चुनौतियों, सैन्य जीवन की कहानियों और भविष्य में सेना और समुदाय के बीच सहयोग को लेकर चर्चा करेंगे।
बैठक में असम राइफल्स के कई वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल होंगे। उन्हें सेना की नई नीतियों, पूर्व सैनिकों के कल्याण योजनाओं और स्थानीय स्तर पर रोजगार और सहायता कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, उनके अनुभव और सुझाव सेना के भविष्य के प्रशिक्षण और रणनीतियों के लिए मार्गदर्शन के रूप में उपयोग किए जाएंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल लखेरा ने पहले भी पूर्व सैनिकों के कल्याण और उनके समुदाय में योगदान को लेकर कई पहलें की हैं। इस बैठक में वह विशेष रूप से यह जानने का प्रयास करेंगे कि सेवा निवृत्त होने के बाद सैनिकों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
पूर्व सैनिकों का कहना है कि ऐसे संवाद से उन्हें न केवल सम्मान की भावना मिलती है बल्कि वे अपने अनुभव साझा करके आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन भी तैयार कर सकते हैं। बैठक में सेवा के दौरान आए अनुभवों और चुनौतियों पर भी चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सेना और पूर्व सैनिकों के बीच यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं है। इससे न केवल पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समाधान आसान होता है, बल्कि सेना के प्रशिक्षण और रणनीति को भी सुधारने में मदद मिलती है। यह पहल सेना की सामाजिक जिम्मेदारी और पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
पालमपुर में आयोजित यह बैठक स्थानीय समुदाय और सेना के बीच भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इससे यह संदेश जाएगा कि पूर्व सैनिकों की सेवाओं और उनके योगदान को सेना और समाज दोनों ही मान्यता देते हैं।
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