हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में फलों से वाइन बनाने की पहल, बरोटी डैहर प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

nidhi
27 July 2026 7:53 AM IST
हिमाचल में फलों से वाइन बनाने की पहल, बरोटी डैहर प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
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बरोटी डैहर प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

Himachal Pradesh: मंडी जिले के सुंदरनगर क्षेत्र में फल प्रसंस्करण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। बरोटी डैहर में एक नए वाइन निर्माण प्रोजेक्ट की स्थापना की योजना है, जहां प्रदेश के प्रमुख फलों आम, सेब और बुरांस (रhododendron) से वाइन तैयार की जाएगी। इस परियोजना से स्थानीय किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।

स्थानीय फलों को मिलेगा नया बाजार
हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा राज्य के कई क्षेत्रों में आम और बुरांस भी अच्छी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। कई बार अधिक उत्पादन या बाजार की कमी के कारण किसानों को अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल पाता।
प्रस्तावित वाइन प्रोजेक्ट के शुरू होने से इन फलों का प्रसंस्करण स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए नया बाजार मिलेगा और फलों की बर्बादी भी कम होगी।
सुंदरनगर के बरोटी डैहर में स्थापित होगा संयंत्र
यह परियोजना मंडी जिले के सुंदरनगर के बरोटी डैहर क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। यहां आधुनिक तकनीक से वाइन निर्माण की सुविधा विकसित की जाएगी, जहां फलों की गुणवत्ता बनाए रखते हुए मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
संयंत्र के शुरू होने से क्षेत्र में परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण और प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि और बागवानी उत्पादों का मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। सेब, आम और बुरांस जैसे फलों से वाइन तैयार होने पर किसानों को पारंपरिक बिक्री की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यमों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वाइन निर्माण इकाई में तकनीकी कर्मचारियों, मशीन ऑपरेटरों, गुणवत्ता नियंत्रण विशेषज्ञों, पैकेजिंग स्टाफ और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोगों की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा फल संग्रह, आपूर्ति और विपणन से जुड़े कार्यों में भी स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।
बागवानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
हिमाचल सरकार लगातार बागवानी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। फल प्रसंस्करण से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह के फल प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से जुड़े उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। इससे हिमाचल के कृषि और बागवानी क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

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