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प्रदेश में नसबंदी फेल मामलों में बढ़ोतरी, NHM रिपोर्ट में खुलासा

Himachal हिमाचल : प्रदेश में परिवार नियोजन कार्यक्रम को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की आंतरिक रिपोर्ट ने गंभीर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में सामने आया है कि राज्य में नसबंदी फेल होने के मामलों में पिछले एक वर्ष के भीतर करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़े स्वास्थ्य व्यवस्था और परिवार नियोजन कार्यक्रम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में नसबंदी असफल होने के 21 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24 तक पहुंच गई है। हालांकि संख्या में वृद्धि भले ही कम दिखती हो, लेकिन इसे चिकित्सा प्रक्रिया की प्रभावशीलता और निगरानी व्यवस्था के लिहाज से गंभीर संकेत माना जा रहा है।
परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसे जनसंख्या नियंत्रण और मातृ स्वास्थ्य सुधार के उद्देश्य से अपनाया जाता है। ऐसे में इसके फेल होने के मामले न केवल प्रभावित परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र पर भी भरोसे को प्रभावित करते हैं।
एनएचएम की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्यस्तरीय समिति ने इन मामलों की समीक्षा के बाद 19 मामलों को मुआवजा देने की मंजूरी प्रदान की है। यह मुआवजा उन परिवारों को दिया जाएगा जिनके मामलों में नसबंदी विफल हुई और उन्हें अनचाहे परिणामों का सामना करना पड़ा।
वहीं दो मामलों में नियमों के अनुरूप दस्तावेज या परिस्थितियां नहीं पाए जाने के कारण दावे अस्वीकार कर दिए गए हैं। इसके अलावा तीन मामलों में रिकॉर्ड अधूरा पाया गया, जिसके चलते उन्हें आगे की जांच और अतिरिक्त जानकारी के लिए जिला इंडेमनिटी कमेटी को वापस भेजा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नसबंदी फेल होने के मामलों की नियमित निगरानी की जाती है और हर मामले की जांच प्रक्रिया के बाद ही मुआवजा तय किया जाता है। हालांकि इस रिपोर्ट ने यह संकेत दिया है कि प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है, ताकि ऐसे मामलों को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि नसबंदी जैसी स्थायी गर्भनिरोधक प्रक्रिया में फेलियर के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सर्जरी की तकनीकी त्रुटियां, पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल में कमी या जैविक कारण शामिल हो सकते हैं। ऐसे मामलों में उचित निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण बेहद जरूरी माना जाता है।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इस तरह की प्रक्रियाओं के बाद फॉलो-अप व्यवस्था कई बार कमजोर हो जाती है, जिससे समस्याएं समय पर सामने नहीं आ पातीं। उन्होंने सुझाव दिया है कि जागरूकता और नियमित जांच प्रणाली को और मजबूत किया जाए।
परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार समय-समय पर नसबंदी शिविरों का आयोजन करती है, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल शिविर आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर चरण पर गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन भी जरूरी है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पर कार्यक्रम की समीक्षा और सुधार के लिए दबाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में नसबंदी प्रक्रियाओं की निगरानी को और सख्त किया जा सकता है और मेडिकल स्टाफ के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जाएगा।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और त्वरित मुआवजा प्रक्रिया प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन लंबे समय में लक्ष्य यह होना चाहिए कि ऐसे फेलियर की घटनाएं ही कम से कम हों।
फिलहाल एनएचएम की इस रिपोर्ट ने राज्य में परिवार नियोजन कार्यक्रम की कार्यप्रणाली पर ध्यान केंद्रित कर दिया है और स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।





