हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में इलेक्ट्रिक बसों का असर, 24 दिनों में HRTC को 19.32 लाख का मुनाफा

Kavita2
20 Sept 2026 1:48 PM IST
हिमाचल में इलेक्ट्रिक बसों का असर, 24 दिनों में HRTC को 19.32 लाख का मुनाफा
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मंडी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार की इलेक्ट्रिक बस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। मंडी जिले में नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जहां यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक परिवहन सुविधा मिल रही है, वहीं निगम की परिचालन लागत में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है।

मंडी जिले को मिली 25 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से महज 24 दिनों में हिमाचल पथ परिवहन निगम को 19.32 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। यह उपलब्धि मंडी और सुंदरनगर डिपो के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से डीजल पर होने वाला खर्च काफी कम हुआ है। इससे निगम को आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ-साथ HRTC के खर्चों को कम करना है।

मंडी डिपो की 15 ई-बसों से बड़ी बचत

मंडी डिपो में संचालित 15 इलेक्ट्रिक बसों ने 24 दिनों की अवधि में कुल 60,060 किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान इन बसों को चलाने में चार्जिंग पर कुल 7.95 लाख रुपये खर्च हुए।

अगर इतनी ही दूरी डीजल से चलने वाली बसों से तय की जाती तो अनुमानित रूप से करीब 19.30 लाख रुपये का खर्च आता। इस तरह इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से मंडी डिपो को लगभग 11.34 लाख रुपये की बचत हुई।

यह आंकड़े बताते हैं कि इलेक्ट्रिक बसें न केवल पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी निगम के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं।

सुंदरनगर डिपो को भी मिला लाभ

मंडी जिले के सुंदरनगर डिपो में भी इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से निगम को आर्थिक फायदा हुआ है। यहां भी ई-बसों के कारण ईंधन खर्च में बड़ी कमी आई और परिचालन लागत कम हुई।

दोनों डिपो को मिलाकर 24 दिनों में कुल 19.32 लाख रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने से बचत का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

यात्रियों को मिल रही बेहतर सुविधा

इलेक्ट्रिक बसों के आने से यात्रियों को भी बेहतर अनुभव मिल रहा है। नई बसों में आरामदायक सीटें, कम शोर और बेहतर यात्रा सुविधा उपलब्ध है। शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच चलने वाली इन बसों से लोगों को आधुनिक परिवहन सुविधा मिल रही है।

यात्रियों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों में सफर ज्यादा आरामदायक महसूस होता है। इसके अलावा धुआं कम निकलने के कारण पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

पर्यावरण संरक्षण में भी मदद

डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें प्रदूषण कम करती हैं। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य सरकार और HRTC का लक्ष्य धीरे-धीरे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इससे ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

HRTC को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

HRTC लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों का सामना करता रहा है। परिचालन खर्च, ईंधन कीमतों और रखरखाव लागत में बढ़ोतरी के कारण निगम पर वित्तीय दबाव रहता है।

ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन निगम के लिए राहत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कम संचालन लागत के कारण भविष्य में निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

सरकार की योजना को मिल रहा समर्थन

प्रदेश सरकार सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है। नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत इसी योजना का हिस्सा है।

अधिकारियों का कहना है कि जहां भी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया गया है, वहां यात्रियों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। साथ ही निगम को ईंधन खर्च में बड़ी राहत मिली है।

आगे बढ़ेगा इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क

मंडी जिले में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर जोर दिया जा सकता है। निगम उन रूटों पर भी इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की संभावनाएं तलाश रहा है, जहां यात्रियों की संख्या अधिक है।

24 दिनों में 19.32 लाख रुपये की बचत और मुनाफा यह संकेत देता है कि इलेक्ट्रिक बसें HRTC के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से लाभकारी विकल्प साबित हो रही हैं।

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