हिमाचल प्रदेश

नशा विरोधी अभियानों के बावजूद मंडी में जारी भांग की अवैध खेती

Kavita2
5 Aug 2026 9:46 AM IST
नशा विरोधी अभियानों के बावजूद मंडी में जारी भांग की अवैध खेती
x

मंडी। पुलिस के लगातार चल रहे नशा विरोधी अभियानों और सख्त निगरानी के बावजूद हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भांग की अवैध खेती पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है। जिले के दूरदराज और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का फायदा उठाकर कुछ लोग अब भी प्रतिबंधित फसल की खेती करने में जुटे हुए हैं। हालांकि पुलिस और संबंधित विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर अवैध खेती को नष्ट कर रहे हैं, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह चुनौती बनी हुई है।

मंडी जिले के कई क्षेत्र पहाड़ी, जंगलों से घिरे और कठिन पहुंच वाले हैं। इन इलाकों में नियमित निगरानी करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग छिपे हुए स्थानों पर भांग की खेती कर लेते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं और खेतों की पहचान कर अवैध फसल को नष्ट किया जाता है।

नशे के खिलाफ पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, बिक्री और खेती पर नजर रखी जा रही है। पुलिस की टीमें स्थानीय स्तर पर सूचनाएं जुटाने के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त भी बढ़ा रही हैं। इसके बावजूद कुछ इलाकों में छिपकर की जा रही खेती पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, अवैध भांग की खेती करने वाले लोग अक्सर ऐसे स्थानों का चयन करते हैं, जहां आम लोगों की आवाजाही कम होती है। पहाड़ी ढलानों, जंगलों और दूरस्थ क्षेत्रों में छोटे-छोटे हिस्सों में खेती की जाती है, ताकि आसानी से पहचान न हो सके। कई बार स्थानीय लोगों से मिली सूचनाओं के आधार पर पुलिस इन स्थानों तक पहुंचती है और कार्रवाई करती है।

पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को अवैध खेती और नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा रही है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि यदि कहीं प्रतिबंधित फसल की खेती या नशे से जुड़ी गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत सूचना दें।

भांग की अवैध खेती न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह समाज में नशे की समस्या को बढ़ावा देने का भी एक बड़ा कारण बन सकती है। अवैध रूप से उगाई जाने वाली भांग का इस्तेमाल नशीले पदार्थों के निर्माण और तस्करी में किया जाता है। इससे युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है।

पुलिस और प्रशासन की ओर से समय-समय पर संयुक्त अभियान चलाकर अवैध खेती को नष्ट किया जाता है। इन अभियानों में पुलिस के अलावा राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होते हैं। कार्रवाई के दौरान फसल को नष्ट करने के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाती है।

मंडी जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पुलिस अब तकनीकी माध्यमों का भी इस्तेमाल कर रही है। संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, स्थानीय नेटवर्क को मजबूत करना और सूचना तंत्र को सक्रिय रखना इस अभियान का हिस्सा है। अधिकारियों का मानना है कि लगातार कार्रवाई और जन सहयोग से अवैध खेती पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दूरस्थ क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर और आर्थिक कारण भी लोगों को गलत रास्ते पर ले जाते हैं। ऐसे में प्रशासन को नशा विरोधी अभियान के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों पर भी ध्यान देना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में नशे की समस्या से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति की जरूरत है। इसमें कानून लागू करने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। केवल फसल नष्ट करने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे के कारणों पर भी काम करना होगा।

फिलहाल मंडी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध भांग की खेती और नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि जिले के किसी भी हिस्से में प्रतिबंधित फसल की खेती या नशीले पदार्थों की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दुर्गम इलाकों में छिपकर की जा रही अवैध खेती को रोकना पुलिस के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन लगातार निगरानी, सूचना तंत्र और स्थानीय सहयोग के माध्यम से इस पर अंकुश लगाने के प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में पुलिस ऐसे क्षेत्रों में अभियान और तेज करने की तैयारी कर रही है, ताकि जिले को नशे के बढ़ते प्रभाव से बचाया जा सके।

Next Story