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IIT मंडी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया ड्राइवर नींद डिटेक्शन सिस्टम

Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : मनुष्य की थकान और नींद अक्सर सड़क हादसों का कारण बनती है, खासकर बस और ट्रक ड्राइवरों के लिए। ऐसे हादसे कई बार जानलेवा साबित होते हैं और यात्रियों व सड़क पर मौजूद लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने एक अनूठा समाधान विकसित किया है।
शोधार्थियों की टीम ने “सेफ डैश” नामक रियल-टाइम ड्राइवर ड्रोसिनैस (नींद) डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है। यह सिस्टम ड्राइवर के चेहरे और पलक झपकने के पैटर्न को लगातार मॉनिटर करता है। जब ड्राइवर की पलक झपकने की गति असामान्य रूप से धीमी या अनियमित होती है, जो नींद आने के शुरुआती संकेत हैं, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है।
टीम के प्रमुख शोधार्थी डॉ. अर्चित वर्मा ने बताया, “सेफ डैश सिस्टम का मकसद ड्राइवर की थकान को समय रहते पहचानना और सड़क पर संभावित हादसों को रोकना है। हमारा सिस्टम ड्राइवर के चेहरे की बारीक हाव-भाव और आंखों की गति का विश्लेषण करके नींद की संभावना का तुरंत पता लगाता है।”
इस सिस्टम को ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह ड्राइवर को आवाज़ और विजुअल अलर्ट के जरिए सचेत कर सके। अगर ड्राइवर की नींद की स्थिति गंभीर हो जाती है, तो सिस्टम वाहन के ब्रेक या इंजन नियंत्रण से जुड़ी तकनीक के माध्यम से उसे धीमा करने का सुझाव भी दे सकता है। इससे सड़क पर अनियंत्रित वाहन के चलते होने वाले हादसों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।
आईआईटी मंडी की टीम ने कहा कि यह सिस्टम विशेष रूप से लंबी दूरी की बसों और भारी वाहन चालक के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। वर्तमान में कई बस और ट्रक हादसे चालक की थकान या नींद के कारण होते हैं, जिनमें गंभीर चोटें और मौतें होती हैं। सेफ डैश की मदद से ऐसे हादसों को न्यूनतम करने की उम्मीद है।
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि सेफ डैश सिस्टम को कम लागत में तैयार किया गया है और इसे मौजूदा वाहनों में आसानी से इंस्टॉल किया जा सकता है। भविष्य में टीम इसे और उन्नत बनाने की योजना बना रही है, ताकि यह मौसम, रोशनी और वाहन की गति जैसे अतिरिक्त पैरामीटर्स को भी ध्यान में रखकर और अधिक सटीक अलर्ट दे सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के तकनीकी नवाचार सड़क सुरक्षा में नई दिशा प्रदान करेंगे। सेफ डैश जैसे सिस्टम न केवल ड्राइवरों को सुरक्षित रखेंगे बल्कि यात्रियों और सड़क पर मौजूद आम लोगों के लिए भी सुरक्षा की गारंटी देंगे।
आईआईटी मंडी के शोधार्थियों का यह प्रयास सड़क हादसों को रोकने और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में तकनीकी सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





