हिमाचल प्रदेश

HPTDC चीफ ने होटल प्राइवेटाइजेशन को लेकर उठाए सवाल

Payal
16 April 2026 4:43 PM IST
HPTDC चीफ ने होटल प्राइवेटाइजेशन को लेकर उठाए सवाल
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HPTDC) के प्रमुख ने राज्य में होटलों के निजीकरण (प्राइवेटाइजेशन) की बढ़ती प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में सरकारी भागीदारी कम होने से न केवल निगम की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है, बल्कि राज्य की पर्यटन नीति पर भी इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
HPTDC प्रमुख ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक प्रमुख पर्यटन राज्य है, जहां सरकारी होटलों की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। ये होटल न केवल पर्यटकों को किफायती और विश्वसनीय आवास प्रदान करते हैं, बल्कि राज्य की पर्यटन पहचान को भी मजबूत बनाते हैं। ऐसे में इन संपत्तियों का निजीकरण कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि निजीकरण के चलते कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। कई सरकारी होटल वर्षों से स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं, और अगर इनका संचालन निजी हाथों में जाता है तो इससे कर्मचारियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी होटलों का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि पर्यटन ढांचे को संतुलित और सुलभ बनाए रखना भी होता है। HPTDC प्रमुख ने इसी संदर्भ में कहा कि सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है ताकि सार्वजनिक हितों की रक्षा की जा सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि निजीकरण के बजाय सरकारी होटलों के आधुनिकीकरण और बेहतर प्रबंधन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। तकनीकी सुधार, डिजिटल बुकिंग सिस्टम और बेहतर सेवाओं के माध्यम से इन होटलों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने भी इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ का मानना है कि निजीकरण से सेवा गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, जबकि अन्य का कहना है कि इससे सरकारी नियंत्रण कमजोर हो जाएगा और स्थानीय हित प्रभावित हो सकते हैं।
HPTDC प्रमुख ने यह भी कहा कि हिमाचल की पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक संतुलित नीति की आवश्यकता है, जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी हो, लेकिन सार्वजनिक हितों की अनदेखी न की जाए।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की है कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया जाए और सभी हितधारकों की राय ली जाए। उनका कहना है कि पर्यटन क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके साथ किसी भी प्रकार का प्रयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
इस बयान के बाद राज्य में पर्यटन नीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और भविष्य में होटलों के निजीकरण को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।
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