हिमाचल प्रदेश

खराब मौसम की मार, बीड़-बिलिंग छोड़ रहे 250 विदेशी पैराग्लाइडर

Kiran
3 Nov 2026 2:34 PM IST
खराब मौसम की मार, बीड़-बिलिंग छोड़ रहे 250 विदेशी पैराग्लाइडर
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दुनिया के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थलों में से एक, बीर-बिलिंग में विदेशी पायलटों के आने की संख्या में कमी देखी जा रही है। घाटी में पहुंचे लगभग 500 अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडरों में से आधे से अधिक के अपने-अपने देशों में वापस लौटने की खबर है। खराब मौसम और उड़ान भरने पर प्रशासनिक पाबंदियां बड़ी बाधा बनकर उभरी हैं। इससे वे पायलट निराश हुए हैं, जो धौलाधार पर्वतमाला में लंबी दूरी की उड़ानों का अनुभव लेने के लिए हजारों किलोमीटर का सफर तय करके आए थे।
अनुमान के मुताबिक, लगभग दो दर्जन देशों से करीब 500 विदेशी पैराग्लाइडिंग पायलट क्रॉस-कंट्री उड़ान का अभ्यास करने और इस साहसिक खेल के प्रति अपने जुनून को पूरा करने के लिए घाटी में आए थे। हालांकि, खबर है कि इनमें से आधे से अधिक लोग अपनी योजना से पहले ही बीर-बिलिंग से वापस चले गए हैं। 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच का समय पैराग्लाइडिंग के लिए 'पीक सीजन' माना जाता है, खासकर क्रॉस-कंट्री और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए। बीर-बिलिंग अपनी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों और उड़ान के बेहतरीन मौकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर है। लेकिन, अनिश्चित मौसम और बार-बार उड़ान गतिविधियों पर रोक लगने की वजह से यहां आने वाले पायलटों की योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
विदेशी पैराग्लाइडर आमतौर पर घाटी में 15 से 20 दिन बिताते हैं। वे रहने, परिवहन, खाने-पीने और पर्यटन से जुड़ी अन्य सेवाओं पर खर्च करके स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं। उनके जल्दी चले जाने से होटल, होमस्टे, टैक्सी ऑपरेटर, रेस्तरां और एडवेंचर टूरिज्म पर निर्भर अन्य व्यवसायों पर बुरा असर पड़ सकता है। स्थानीय होटल व्यवसायी अंकित सूद ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों से बीर-बिलिंग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन न होने से पर्यटन से जुड़े लोगों में चिंता है। ऐसे आयोजनों का न हो पाना इस जगह की अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए एक बड़ा झटका है।"
उन्होंने आगे कहा, "बीर-बिलिंग सिर्फ 'टैंडेम' (दो लोगों वाली) पैराग्लाइडिंग के लिए ही नहीं जाना जाता। इसने अंतरराष्ट्रीय पायलटों के बीच सोलो (अकेले) उड़ान, क्रॉस-कंट्री अभियानों और लंबी दूरी की उड़ान चुनौतियों के लिए भी अपनी पहचान बनाई है। दुनिया भर से पायलट अपनी उड़ान कौशल को बेहतर बनाने और अपनी क्षमताओं को परखने के लिए इस घाटी में आते हैं।" सुरेश ठाकुर, जो पैराग्लाइडिंग गतिविधियों से जुड़े हैं और धौलाधार पर्वतमाला के ऊंचे इलाकों में पैराग्लाइडर्स के लिए बचाव कार्यों (रेस्क्यू ऑपरेशंस) का नेतृत्व करते हैं, ने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन को इस खेल को बढ़ावा देने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति अपनानी चाहिए। साथ ही, उन्हें सुरक्षा नियमों और खेल गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है।
उनका मानना ​​है कि सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए, लेकिन प्रशासनिक फैसले तकनीकी विशेषज्ञों और पैराग्लाइडिंग समुदाय के प्रतिनिधियों से सलाह लेने के बाद ही लिए जाने चाहिए। ठाकुर ने कहा कि लगातार बनी रहने वाली अनिश्चितता के कारण भविष्य में अंतरराष्ट्रीय पायलट 'बीर-बिलिंग' को चुनने से कतरा सकते हैं। इससे न केवल वैश्विक स्तर पर इस जगह की पहचान प्रभावित होगी, बल्कि पर्यटन से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी बुरा असर पड़ेगा।
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