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हिमाचल प्रदेश
कुगति अभयारण्य में दिखा हिमालयी भूरा भालू, वन विभाग में उत्साह
nidhi
13 Oct 2026 8:38 AM IST

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भरमौर के जंगलों से अच्छी खबर
चंबा: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र भरमौर स्थित कुगति वन्यजीव अभयारण्य में दुर्लभ हिमालयी भूरे भालू की मौजूदगी एक बार फिर दर्ज की गई है। कुछ दिन पहले इसी अभयारण्य में एक मादा भालू अपने दो शावकों के साथ दिखाई दी थी। इसके बाद अब एक नर भालू जंगल में अकेले विचरण करता नजर आया है। वन विभाग के कर्मचारी ने इस दुर्लभ वन्यजीव को अपने कैमरे में कैद किया है। लगातार सामने आ रही इन तस्वीरों से वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह है।
कुगति वन्यजीव अभयारण्य हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां ऊंचे पहाड़, घने जंगल और प्राकृतिक वातावरण विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों को आवास उपलब्ध कराते हैं। हिमालयी भूरे भालू की मौजूदगी को इस क्षेत्र के वन्यजीवों के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वन रक्षक सचिन कुमार अपनी नियमित ड्यूटी के दौरान अभयारण्य क्षेत्र में निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें जंगल में एक नर भूरा भालू दिखाई दिया। उन्होंने वन्यजीव की गतिविधियों को कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में मादा भालू के साथ दो शावक देखे गए थे।
वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुगति अभयारण्य में दुर्लभ भूरे भालुओं की लगातार मौजूदगी सामने आ रही है। विभाग ने इन वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। वन रक्षक सुबह और शाम जंगल में गश्त कर रहे हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारी भी समय-समय पर क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं।
वन्यजीव विभाग के डीएफओ कुलदीप जम्वाल ने बताया कि कुगति में दुर्लभ हिमालयी भूरा भालू बार-बार दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग इन वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है। हिमालयी भूरा भालू पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण प्रजातियों में शामिल है। यह मुख्य रूप से हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। इसका शरीर घने बालों से ढका रहता है, जो ठंडे वातावरण में रहने में सहायता करते हैं। यह भालू विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों, जड़ों, फलों और छोटे जीवों को अपने भोजन में शामिल करता है।
इस प्रजाति के संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप, प्राकृतिक आवासों में बदलाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियां भालुओं के संरक्षण को प्रभावित कर सकती हैं। कुगति अभयारण्य में मादा भालू के दो शावकों के साथ दिखाई देने की घटना भी संरक्षण के लिहाज से उल्लेखनीय है। यह क्षेत्र में भालुओं की प्रजनन गतिविधियों का संकेत देती है। हालांकि, भालुओं की कुल आबादी में वास्तविक वृद्धि की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण और लंबे समय तक निगरानी आवश्यक है।
वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, किसी दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी का लगातार दर्ज होना उसके प्राकृतिक आवास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। कैमरों के माध्यम से प्राप्त तस्वीरें वन्यजीवों की पहचान, गतिविधियों और उनके विचरण क्षेत्रों को समझने में मदद करती हैं। भरमौर का कुगति वन्यजीव अभयारण्य पहले भी दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर चर्चा में रहा है। यहां हिमालयी तहर जैसी प्रजातियों की मौजूदगी भी दर्ज की जा चुकी है। इससे क्षेत्र की जैव विविधता का महत्व सामने आता है।
वन विभाग अब हिमालयी भूरे भालू के प्राकृतिक आवास की निगरानी और अवैध शिकार की रोकथाम पर ध्यान दे रहा है। विभागीय अधिकारियों का प्रयास है कि इन दुर्लभ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रखा जा सके। कुगति के जंगलों में बार-बार दिखाई दे रहे हिमालयी भूरे भालू ने वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई उम्मीद दी है। वन विभाग के लिए अब इन वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ उनके आवास की दीर्घकालिक निगरानी महत्वपूर्ण होगी।
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