हिमाचल प्रदेश

हिमाचल की रुचिका का हल्लासन ट्रैक पर हैरतअंगेज कारनामा

Saba Naaz
12 July 2026 3:26 PM IST
हिमाचल की रुचिका का हल्लासन ट्रैक पर हैरतअंगेज कारनामा
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धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज दुनिया भर में अपनी प्रतिभा, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का लोहा मनवा रही हैं। खेल, शिक्षा और अभिनय के बाद अब साहसिक खेलों के क्षेत्र में भी हिमाचल की बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसी गौरवमयी कड़ी में पालमपुर उपमंडल के लोअर खैरा गांव की रहने वाली 34 वर्षीय बेटी रुचिका भंगलिया ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रुचिका ने दक्षिण कोरिया की सबसे ऊंची और बेहद दुर्गम पर्वत चोटी 'हल्लासन' (1,947 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह कर देश और प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक और साहसिक उपलब्धि के बाद से पालमपुर सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी, उत्साह और गर्व का माहौल देखा जा रहा है।

रुचिका भंगलिया ने 8 जुलाई 2026 को इस बेहद चुनौतीपूर्ण और थका देने वाले ट्रैक को पूरा करते हुए हल्लासन के सर्वोच्च शिखर पर कदम रखा और वहां जीत का परचम लहराया। आपको बता दें कि माउंट हल्लासन कोई आम पर्वत नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत प्रसिद्ध और सक्रिय रहा ज्वालामुखीय पर्वत (Volcanic Mountain) है, जो दक्षिण कोरिया के खूबसूरत जेजू द्वीप (Jeju Island) पर स्थित है। यह चोटी अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ जैव विविधता और अत्यंत कठिन तथा रोमांचक ट्रेकिंग मार्गों के लिए दुनिया भर के पर्वतारोहियों और प्रकृति प्रेमियों के बीच जानी जाती है। इस ज्वालामुखीय पर्वत का ट्रैक जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक और चट्टानी भी है, जहाँ पल-पल बदलते मौसम के बीच चढ़ाई करना किसी भी पर्वतारोही के हौसले की सबसे बड़ी परीक्षा होती है।

इस साहसिक कारनामे को अंजाम देने वाली रुचिका सिर्फ एक पर्वतारोही ही नहीं हैं, बल्कि वे एक सफल महिला उद्यमी भी हैं। रुचिका वर्तमान में देश की राजधानी दिल्ली में रहकर अपना खुद का एक जाना-माना स्टार्टअप 'पहाड़न बेकर्स' (Pahadan Bakers) चलाती हैं और उसकी संस्थापक हैं। एक व्यवसायी के तौर पर बेहद व्यस्त और भागदौड़ भरी दिनचर्या होने के बावजूद रुचिका लंबे समय से ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के प्रति पूरी तरह से समर्पित रही हैं। उन्होंने अपने काम और अपने शौक के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया। अपनी व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने इस अभियान के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर खुद को तैयार किया और आखिरकार इस कठिन अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देकर ही दम लिया।

अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद रुचिका भंगलिया ने अपना अनुभव साझा करते हुए युवाओं और खासकर देश की बेटियों को एक बेहद खूबसूरत संदेश दिया है। उनका मानना है कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियां और दुर्गम रास्ते वास्तव में व्यक्ति के हौसले और उसके इरादों की परीक्षा लेते हैं। अगर मन में अटूट विश्वास हो और निरंतर प्रयास किया जाए, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। रुचिका की यह बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता आज समाज की उन तमाम बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बहुत बड़ा स्रोत बन गई है, जो अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर कुछ अलग करना चाहते हैं। पालमपुर की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि पहाड़ का हौसला लेकर चलने वाले किसी भी बाधा के सामने झुकते नहीं, बल्कि उसे फतह कर नया इतिहास रचते हैं।

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