हिमाचल प्रदेश

हिमाचल की बेटी रुचिका भंगलिया ने दक्षिण कोरिया की सबसे ऊंची चोटी हल्लासन फतह कर रचा इतिहास

Kavita2
12 July 2026 3:15 PM IST
हिमाचल की बेटी रुचिका भंगलिया ने दक्षिण कोरिया की सबसे ऊंची चोटी हल्लासन फतह कर रचा इतिहास
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पालमपुर : हिमाचल प्रदेश की बेटियां अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा और साहस का प्रदर्शन कर रही हैं। इसी कड़ी में पालमपुर उपमंडल के लोअर खैरा गांव की रहने वाली 34 वर्षीय रुचिका भंगलिया ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है। पहाड़न बेकर्स की संस्थापक रुचिका ने दक्षिण कोरिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी हल्लासन को सफलतापूर्वक फतह कर अपने साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है।

रुचिका ने 8 जुलाई 2026 को चुनौतीपूर्ण ट्रैक पूरा करते हुए हल्लासन पर्वत के शिखर तक पहुंचने में सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि के बाद पालमपुर और पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है। परिजनों, ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने उनकी सफलता पर बधाई देते हुए इसे प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बताया है।

दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप पर स्थित हल्लासन पर्वत समुद्र तल से करीब 1,947 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक प्रसिद्ध ज्वालामुखीय पर्वत है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और रोमांचक ट्रैकिंग मार्गों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में पर्वतारोही और प्रकृति प्रेमी इस चोटी को फतह करने के लिए पहुंचते हैं।

रुचिका के लिए हल्लासन की चढ़ाई केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं था, बल्कि यह उनके आत्मविश्वास, मेहनत और चुनौती स्वीकार करने की क्षमता का प्रमाण भी है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को पूरा किया और शिखर तक पहुंचकर एक यादगार उपलब्धि अपने नाम की।

लोअर खैरा गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली रुचिका भंगलिया ने अपने कार्यक्षेत्र में भी अलग पहचान बनाई है। वह पहाड़न बेकर्स की संस्थापक हैं और उद्यमिता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। व्यवसाय के साथ-साथ उन्होंने साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण के प्रति अपनी रुचि को भी आगे बढ़ाया है।

रुचिका की इस उपलब्धि को हिमाचल की महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों की बेटियां अब शिक्षा, खेल, व्यवसाय और साहसिक अभियानों सहित हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। रुचिका की सफलता भी इसी बदलाव की एक मिसाल है।

परिवार और स्थानीय लोगों ने बताया कि रुचिका हमेशा से ही नई चुनौतियों को स्वीकार करने और कुछ अलग करने की इच्छा रखती थीं। उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की और शारीरिक व मानसिक तैयारी के साथ हल्लासन चोटी पर पहुंचने का सपना पूरा किया।

हल्लासन ट्रैक को आसान नहीं माना जाता है। इस दौरान मौसम में बदलाव, ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन और लंबे रास्ते जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शिखर तक पहुंचना किसी भी ट्रैकर के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। रुचिका ने इन सभी चुनौतियों को पार करते हुए यह सफलता हासिल की।

उनकी उपलब्धि के बाद क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह है। ग्रामीणों का कहना है कि रुचिका ने न केवल अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की अन्य बेटियों को भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया है।

स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों ने उम्मीद जताई है कि रुचिका भविष्य में भी इसी तरह नई ऊंचाइयों को छूती रहेंगी। उनका कहना है कि ऐसी उपलब्धियां युवाओं में साहसिक गतिविधियों और नए लक्ष्यों को हासिल करने का उत्साह बढ़ाती हैं।

रुचिका की हल्लासन विजय हिमाचल प्रदेश की उस परंपरा को भी आगे बढ़ाती है, जहां लोग पहाड़ों और प्रकृति से गहरा जुड़ाव रखते हैं। प्रदेश के लोगों के लिए पर्वत केवल भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और उपलब्धियों का प्रतीक रहे हैं।

रुचिका भंगलिया की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर जुनून, मेहनत और आत्मविश्वास हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। दक्षिण कोरिया की हल्लासन चोटी पर लहराई गई उनकी सफलता की कहानी अब हिमाचल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणा का संदेश दे रही है।

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