हिमाचल प्रदेश

रेल से पहुंचेगा हिमाचली सेब-सब्जी

Kavita2
7 Aug 2026 10:42 AM IST
रेल से पहुंचेगा हिमाचली सेब-सब्जी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश से देश के विभिन्न हिस्सों में सेब और सब्जियों की ढुलाई के लिए रेलवे की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव पर किसानों और कमीशन एजेंटों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। जहां इस योजना को बड़े बाजारों तक पहुंच आसान बनाने और परिवहन व्यवस्था में बदलाव के अवसर के रूप में देखा जा रहा है, वहीं किसानों ने माल ढुलाई की लागत और उपज के खराब होने की आशंका को लेकर अपनी चिंताएं भी जाहिर की हैं।

गुरुवार को शिमला में आयोजित एक बैठक में रेलवे अधिकारियों ने फल और सब्जियों की ढुलाई को लेकर अपनी योजना प्रस्तुत की। बैठक में किसानों, आढ़तियों, कमीशन एजेंटों और हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HPSAMB) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत कालका और चंडीगढ़ से माल लोड कर विशेष व्यवस्था के माध्यम से ट्रेनों द्वारा देशभर की प्रमुख फल और सब्जी मंडियों तक पहुंचाने का प्रस्ताव है।

रेलवे का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की बागवानी और कृषि उपज के लिए बेहतर परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है। राज्य में हर साल बड़ी मात्रा में सेब और अन्य फल-सब्जियों का उत्पादन होता है, जिन्हें देश के विभिन्न राज्यों की मंडियों तक पहुंचाया जाता है। वर्तमान में अधिकांश उपज सड़क मार्ग से ट्रकों के माध्यम से भेजी जाती है। रेलवे का मानना है कि रेल परिवहन के माध्यम से लंबी दूरी की ढुलाई को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।

हालांकि, बैठक में किसानों और कारोबारियों ने प्रस्तावित रेल माल ढुलाई दरों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि रेलवे द्वारा बताया गया किराया सड़क मार्ग से उपज पहुंचाने की मौजूदा लागत की तुलना में अधिक है। किसानों ने कहा कि फल और सब्जी उत्पादन पहले ही कई तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में अगर परिवहन लागत बढ़ती है तो इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ेगा।

किसानों और आढ़तियों ने यह भी चिंता जताई कि फल और सब्जियां जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज हैं। ऐसे में समय पर डिलीवरी और उचित भंडारण व्यवस्था बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सड़क मार्ग से ट्रक सीधे खेतों और बागानों से माल उठाकर मंडियों तक पहुंच जाते हैं, जबकि रेल परिवहन में लोडिंग, अनलोडिंग और अन्य प्रक्रियाओं के कारण समय बढ़ सकता है।

बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि यदि रेलवे इस योजना को सफल बनाना चाहता है तो उसे किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए किराए में राहत देनी होगी। इसके अलावा ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे फल और सब्जियों को सुरक्षित तरीके से समय पर गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।

हिमाचल प्रदेश में सेब अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल लाखों पेटी सेब देश के विभिन्न राज्यों की मंडियों में भेजे जाते हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और अन्य बड़े शहरों की मंडियां हिमाचली सेब के प्रमुख बाजार हैं। इसके अलावा राज्य की सब्जियां भी देश के कई हिस्सों में आपूर्ति की जाती हैं।

किसानों का कहना है कि परिवहन व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन नई व्यवस्था तभी लाभकारी होगी जब वह आर्थिक रूप से व्यवहारिक हो। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी सुविधा चाहिए जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो। केवल वैकल्पिक परिवहन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी उपयोगिता और पहुंच भी महत्वपूर्ण है।

रेलवे अधिकारियों ने बैठक में बताया कि इस योजना का उद्देश्य किसानों और व्यापारियों को एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सुझावों को ध्यान में रखते हुए योजना में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। रेलवे की ओर से हितधारकों की चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन दिया गया।

HPSAMB के प्रतिनिधियों ने भी कहा कि किसी भी नई परिवहन व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके व्यावहारिक पहलुओं का मूल्यांकन जरूरी है। उन्होंने किसानों की आय, बाजार की मांग और उपज की गुणवत्ता बनाए रखने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेल परिवहन की व्यवस्था सफल होती है तो हिमाचल के किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। इससे सड़क मार्ग पर निर्भरता कम हो सकती है और लंबी दूरी की ढुलाई में एक नया विकल्प मिल सकता है। लेकिन इसके लिए लागत, समय और भंडारण जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक होगा।

फिलहाल रेलवे के प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। किसानों और अन्य हितधारकों की ओर से दिए गए सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। हिमाचल के बागवानों की नजर अब इस बात पर है कि रेलवे इस योजना को किसानों के लिए कितना किफायती और सुरक्षित बनाता है।

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