हिमाचल प्रदेश

Himachal : बेमौसमी बारिश से सेब उत्पादन पर बड़ा असर, 2.63 लाख मीट्रिक टन गिरावट का अनुमान

Kavita2
6 July 2026 11:10 AM IST
Himachal : बेमौसमी बारिश से सेब उत्पादन पर बड़ा असर, 2.63 लाख मीट्रिक टन गिरावट का अनुमान
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हिमाचल : इस बार बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने बागवानी क्षेत्र को गहरा नुकसान पहुंचाया है। खासकर सेब और अन्य गुठलीदार फलों की फसल पर मौसम की मार साफ तौर पर दिखाई दे रही है। लगातार बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य के संभावित फल उत्पादन के आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश में कुल 6.99 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन हुआ था। लेकिन इस बार स्थिति काफी चिंताजनक नजर आ रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष सेब उत्पादन घटकर करीब 4.36 लाख मीट्रिक टन तक रह सकता है। इसका सीधा मतलब है कि पिछले साल की तुलना में लगभग 2.63 लाख मीट्रिक टन की भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।

राज्य में सेब उत्पादन में यह गिरावट बागवानों के लिए बड़ा आर्थिक झटका मानी जा रही है, क्योंकि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में बागवानी और विशेषकर सेब उत्पादन की अहम भूमिका है। करीब पांच हजार करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था पर आधारित इस क्षेत्र में उत्पादन में आई कमी ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के कारण न केवल फल गिर गए, बल्कि पेड़ों की फूल अवस्था और फल बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। कई इलाकों में समय से पहले बारिश होने से फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है, जिससे बाजार में मिलने वाले दामों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

बागवानों का कहना है कि इस बार मौसम ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। कई क्षेत्रों में सेब के बागानों में भारी नुकसान हुआ है और उत्पादन पहले की तुलना में काफी कम होने की आशंका है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में परिवार सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बागवानी पर निर्भर हैं।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में ओलावृष्टि ने सेब के अलावा नाशपाती, प्लम और अन्य गुठलीदार फलों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। इससे कुल फल उत्पादन पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

सरकारी और कृषि विभाग की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि वास्तविक नुकसान का आंकलन मौसम के स्थिर होने के बाद किया जाएगा, ताकि राहत और सहायता की दिशा में आगे कदम उठाए जा सकें।

हिमाचल प्रदेश में सेब न केवल एक प्रमुख फसल है, बल्कि यह हजारों बागवान परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है। ऐसे में उत्पादन में आई यह गिरावट राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन दोनों पर असर डाल सकती है।

फिलहाल बागवानों को उम्मीद है कि सरकार की ओर से उन्हें उचित सहायता और मुआवजा मिलेगा, ताकि इस नुकसान की भरपाई कुछ हद तक की जा सके। साथ ही विशेषज्ञों ने भी जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए बागवानी में नई तकनीकों और सुरक्षा उपायों को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है।

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