हिमाचल प्रदेश

Himachal में साइबर ठगों के म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर शिकंजा, संदिग्ध बैंक खातों की जांच तेज

Kavita2
13 July 2026 1:00 PM IST
Himachal में साइबर ठगों के म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर शिकंजा, संदिग्ध बैंक खातों की जांच तेज
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Himachal हिमाचल : हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराधियों के एक नए और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के निशाने पर ऐसे गिरोह हैं, जो बैंक खातों को किराये पर लेकर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को छिपाने और आगे पहुंचाने के लिए कर रहे हैं। इन खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

जांच में सामने आया है कि साइबर ठग आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर ऑनलाइन ठगी से हासिल करोड़ों रुपये को कुछ ही मिनटों में एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर देते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए ठगी की रकम का असली स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती है, जिससे पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

साइबर अपराधियों के इस नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिलने वाले इनपुट के आधार पर हिमाचल प्रदेश साइबर सेल और बैंक मिलकर संयुक्त अभियान चला रहे हैं। संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया जा रहा है, ताकि ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठग अब सीधे अपने बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे ऐसे लोगों की तलाश करते हैं, जिन्हें पैसों का लालच देकर बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जा सके। इसके बाद इन खातों में ठगी की रकम जमा कर उसे अलग-अलग खातों में भेजा जाता है।

कई मामलों में देखा गया है कि बेरोजगार युवाओं, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों या ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता है, जिन्हें आसानी से पैसों का लालच दिया जा सके। साइबर अपराधी उन्हें कमीशन देने का वादा कर बैंक खाते, एटीएम कार्ड और मोबाइल नंबर तक हासिल कर लेते हैं।

जांच एजेंसियां अब ऐसे संदिग्ध खातों के लेनदेन की जांच कर रही हैं। इसके अलावा खाताधारकों की केवाईसी प्रक्रिया, बैंक रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

साइबर सेल यह भी पता लगाने में जुटी है कि कहीं इस नेटवर्क में बैंक कर्मचारियों की कोई भूमिका तो नहीं है। संदिग्ध लेनदेन वाले खातों की जांच के दौरान यह देखा जा रहा है कि खाते खोलने की प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। पहले जहां ठगी की रकम सीधे किसी खाते में भेजी जाती थी, वहीं अब अपराधी कई स्तरों पर रकम को ट्रांसफर कर जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं।

ऑनलाइन ठगी के मामलों में डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों ने भी नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। म्यूल अकाउंट इसी तरह का एक तरीका है, जिसमें अपराधी किसी अन्य व्यक्ति के खाते का इस्तेमाल कर खुद को जांच से दूर रखने की कोशिश करते हैं।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों को किसी भी स्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासवर्ड या मोबाइल बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए। बैंक खाते को किराये पर देने या कमीशन के लालच में किसी और के लेनदेन के लिए इस्तेमाल करने से व्यक्ति खुद भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

हिमाचल साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि वे नौकरी, ऑनलाइन कमाई या आसान पैसे के लालच में अपने बैंक खाते किसी को उपलब्ध न कराएं। अगर किसी व्यक्ति को अपने खाते में किसी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलती है तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।

फिलहाल जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। संदिग्ध खातों को फ्रीज करने के साथ-साथ ठगी की रकम के पूरे ट्रेल को खंगाला जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रही यह कार्रवाई डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एजेंसियों का लक्ष्य न केवल ठगी की रकम को रोकना है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचकर कार्रवाई करना भी है।

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