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Himachal : ग्रेट हिमालयन पार्क में स्नो लेपर्ड की वापसी

Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : कुल्लू जिले स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में छह साल बाद एक बार फिर बर्फानी तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) दिखाई दिया है। इस दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी दर्ज होने के बाद वन विभाग ने इसकी संख्या और स्थिति का आकलन करने के लिए नया सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
वन विभाग के अनुसार, पार्क क्षेत्र में स्नो लेपर्ड की संख्या में पिछले छह वर्षों में कितना बदलाव हुआ है, इसका पता लगाने के लिए विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही पार्क में स्थायी कैमरे लगाने की योजना पर भी काम चल रहा है, ताकि इन दुर्लभ जीवों की नियमित निगरानी की जा सके।
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कुल्लू जिले के बंजार क्षेत्र में लगभग 1700 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह क्षेत्र हिमालयी वन्यजीवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण आवास माना जाता है, जहां कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में इस पार्क में स्नो लेपर्ड को लेकर एक विस्तृत सर्वे किया गया था। यह सर्वे मुंबई की स्वयंसेवी संस्था नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन द्वारा किया गया था। उस समय पार्क क्षेत्र में 50 से अधिक कैमरा ट्रैप लगाए गए थे, जिनकी मदद से 19 बर्फानी तेंदुओं और उनके शावकों की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
इसके बाद से लंबे समय तक इस क्षेत्र में स्नो लेपर्ड की स्पष्ट उपस्थिति की कोई बड़ी पुष्टि नहीं हुई थी, जिससे वन्यजीव विशेषज्ञों में चिंता भी जताई जा रही थी। लेकिन अब छह साल बाद फिर से इस दुर्लभ प्रजाति के दिखने से वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में उत्साह बढ़ा है।
वन विभाग का कहना है कि यह उपस्थिति इस बात का संकेत हो सकती है कि पार्क का पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी स्नो लेपर्ड के लिए अनुकूल है। हालांकि, वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक सर्वे जरूरी है।
अधिकारियों के अनुसार, नए सर्वे में आधुनिक तकनीक और अधिक कैमरा ट्रैप का उपयोग किया जाएगा, जिससे स्नो लेपर्ड की सटीक संख्या और उनके आवागमन के पैटर्न का अध्ययन किया जा सके।
इसके साथ ही स्थायी कैमरा सिस्टम लगाने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि पूरे वर्ष इन वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उनके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्नो लेपर्ड जैसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी किसी भी क्षेत्र की जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का भी संकेत माना जाता है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस खबर का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि नए संरक्षण प्रयासों से इस दुर्लभ प्रजाति की सुरक्षा और बेहतर तरीके से की जा सकेगी।
फिलहाल वन विभाग आगामी सर्वे की तैयारी में जुटा हुआ है और जल्द ही इस पर विस्तृत कार्य योजना जारी की जाएगी।





