- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- Himachal : बारिश से...

हिमाचल प्रदेश : राजधानी शिमला में लगातार हो रही बारिश के बीच भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। रविवार को शहर के लिफ्ट क्षेत्र के समीप सड़क विस्तारीकरण और निर्माण कार्य के दौरान पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक दरक गया। इसके बाद भारी मात्रा में मलबा और एक बड़ा पेड़ सड़क पर आ गिरा, जिससे सर्कुलर रोड पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
भूस्खलन की घटना के बाद सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और सड़क से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।
निर्माण कार्य के दौरान दरकी पहाड़ी
जानकारी के अनुसार, लिफ्ट क्षेत्र के पास सड़क निर्माण और विस्तार का कार्य चल रहा है। इसके लिए पहाड़ी की कटाई और खोदाई की जा रही थी। इसी दौरान पहाड़ी का एक हिस्सा कमजोर होकर अचानक खिसक गया।
पहाड़ी से गिरे मलबे के साथ एक विशाल पेड़ भी सड़क पर गिर गया। देखते ही देखते सड़क पूरी तरह बंद हो गई और वाहनों की आवाजाही रुक गई। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सर्कुलर रोड पर यातायात प्रभावित
शिमला का सर्कुलर रोड शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पर्यटक और वाहन रोजाना आवाजाही करते हैं। सड़क बंद होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया और वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की कोशिश की।
राजीव भवन के पास भी हुआ भूस्खलन
शहर के राजीव भवन के पास भी रविवार को लैंडस्लाइड की घटना सामने आई। यहां भूस्खलन के कारण सब्जी मंडी मार्ग प्रभावित हुआ है। सड़क पर मलबा आने से कई वाहन फंस गए।
लगातार बारिश के कारण पहाड़ियों की मिट्टी कमजोर हो रही है, जिससे शहर के कई संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
बारिश के कारण बढ़ा खतरा
शिमला और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान जमीन में नमी बढ़ जाती है, जिससे मिट्टी और चट्टानों के खिसकने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ी कटाई और कमजोर ढलानों के कारण भी भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत होती है।
प्रशासन ने शुरू किया मलबा हटाने का काम
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। मशीनों की मदद से सड़क पर गिरे मलबे और पेड़ को हटाने का काम शुरू किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि सड़क को जल्द से जल्द खोलने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की स्थिति देखकर ही सफर करने की सलाह दी गई है।
लोगों से कहा गया है कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और सड़क पर मलबा या खतरा दिखने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।
पर्यटकों के लिए भी बढ़ी चिंता
शिमला मानसून के दौरान भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में बारिश के कारण सड़क बाधित होने और भूस्खलन की घटनाएं पर्यटकों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती हैं।
प्रशासन की ओर से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित यात्रा करने की सलाह दी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।
मानसून में शिमला के कई क्षेत्र संवेदनशील
शिमला में हर साल मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं सामने आती हैं। शहर की भौगोलिक स्थिति और लगातार बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण कई इलाके संवेदनशील माने जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्य करते समय पर्यावरणीय संतुलन और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम किया जा सके।
फिलहाल लिफ्ट क्षेत्र और राजीव भवन के पास हुई भूस्खलन की घटनाओं के बाद प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सड़क बहाली और यातायात सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।





