हिमाचल प्रदेश

Himachal : सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू, सुक्खू सरकार का बड़ा कदम

Kavita2
24 July 2026 10:15 AM IST
Himachal : सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू, सुक्खू सरकार का बड़ा कदम
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शिमला : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, सक्षम और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है। इसके तहत स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट को संस्थागत रूप दिया जा रहा है और सड़क निर्माण से जुड़े सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल दुर्घटनाओं को रोकने तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह सड़क योजना, डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव की पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होना चाहिए। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आने वाली सड़कों के लिए सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू करने को मंजूरी प्रदान की है।

इस नीति के लागू होने के बाद राज्य में बनने वाली और पहले से मौजूद सड़कों की सुरक्षा का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया जाएगा। सड़क सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किसी सड़क पर दुर्घटना की संभावना किन कारणों से बढ़ रही है और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क सुरक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां भौगोलिक परिस्थितियां, कठिन पहाड़ी मार्ग, मौसम की चुनौतियां और यातायात का बढ़ता दबाव सड़क सुरक्षा को एक गंभीर विषय बनाते हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि सड़कों को इस तरह विकसित किया जाए, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।

नई सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति के तहत सड़क निर्माण की विभिन्न अवस्थाओं में सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। इसमें सड़क की योजना तैयार करने से लेकर डिजाइन, निर्माण कार्य, सड़क शुरू होने के बाद संचालन और समय-समय पर रखरखाव तक सुरक्षा पहलुओं का आकलन किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल वाहन चालकों की लापरवाही से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कई बार सड़क की डिजाइन, संकेतक व्यवस्था, मोड़, जल निकासी, रोशनी और अन्य तकनीकी कारण भी दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक ऑडिट के जरिए इन कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से सड़क सुरक्षा ऑडिट कराने से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा और सड़क सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि ऐसी सड़क व्यवस्था तैयार करना है जो लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी बनी रहे। इसके लिए सड़क निर्माण से जुड़े विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों में सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सरकार लगातार विभिन्न उपाय कर रही है। इनमें सड़क सुधार, ब्लैक स्पॉट की पहचान, सुरक्षा संकेतक लगाना और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना शामिल है।

सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सड़क निर्माण के शुरुआती चरण से ही सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखा जाए तो दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

लोक निर्माण विभाग के तहत आने वाली सड़कों पर यह नीति लागू होने से विभागीय योजनाओं में सुरक्षा को प्राथमिकता मिलेगी। अधिकारियों को सड़क निर्माण और रखरखाव के दौरान सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन करना होगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है। तकनीक के उपयोग, विशेषज्ञों की सलाह और नियमित निगरानी के माध्यम से राज्य में सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सुरक्षित सड़कें प्रदेश के विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क से न केवल आम लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि हिमाचल में सड़क निर्माण और प्रबंधन की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू होने के बाद दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लोगों के जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ काम किया जाएगा, ताकि हिमाचल का सड़क नेटवर्क सुरक्षित और आधुनिक बनाया जा सके।

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