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Himachal हिमाचल : किन्नौर ज़िले के नाथपा इलाके के कचरांग गांव में बुधवार तड़के बादल फटने की घटना के बाद अचानक बाढ़ आ गई, जिससे इलाके में व्यापक नुकसान हुआ। इस प्राकृतिक आपदा के कारण स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर, पीने के पानी की योजनाएं और सेब के बाग प्रभावित हुए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है, लेकिन लोगों में भारी घबराहट का माहौल देखा गया।
अधिकारियों के अनुसार, तड़के कचरांग नाले के ऊपरी हिस्से में बादल फटने की घटना हुई, जिसके बाद पानी का बहाव अचानक तेज हो गया और कुछ ही समय में पूरे क्षेत्र में फैल गया। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा भी नीचे आया, जिससे हालात और गंभीर हो गए। तेज बहाव के कारण गांव को जोड़ने वाली लिंक रोड क्षतिग्रस्त हो गई और नाले पर बना पैदल पुल पूरी तरह बह गया, जिससे स्थानीय संपर्क व्यवस्था बाधित हो गई।
बाढ़ के चलते क्षेत्र की कई पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुईं, जिससे ग्रामीणों को पानी की आपूर्ति में दिक्कतें आने लगी हैं। इसके अलावा पानी और मलबे के तेज बहाव से स्थानीय किसानों के सेब के बागों को भी नुकसान पहुंचा है। सेब की खेती इस क्षेत्र की प्रमुख आजीविका मानी जाती है, ऐसे में इस नुकसान का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। किन्नौर के उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि हालांकि सार्वजनिक ढांचे और बागानों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन किसी भी तरह की जनहानि या बड़े पैमाने पर निजी संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है। उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद प्रशासनिक टीमें और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के साथ ही मरम्मत और बहाली के कार्य शुरू कर दिए हैं। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क संपर्क और पेयजल योजनाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके। राहत कार्य अभी भी जारी हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इस बीच, हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान लगातार बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई क्षेत्रों में मौसम सामान्य से अधिक सक्रिय बना हुआ है। सुंदरनगर में सबसे अधिक 30.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सोलन में 12 मिमी और शिमला में 9.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। धर्मशाला और मंडी में भी हल्की बारिश दर्ज हुई, जहां 1.2 मिमी वर्षा हुई।
मौसम विभाग के अनुसार, लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की संभावना बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और नदियों-नालों के पास न जाने की सलाह दी है।
कचरांग गांव में हुई इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोग फिलहाल राहत और पुनर्वास कार्यों पर निर्भर हैं, जबकि प्रशासन स्थिति को सामान्य करने में जुटा हुआ है





