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हिमाचल प्रदेश
Himachal: पराला सीए सुविधा का री-टेंडर जल्द होने वाला
Ratna Netam
16 April 2026 4:40 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: शिमला में पराला CA (Compost/Conversion Facility) सुविधा के पुनर्वितरण (री-टेंडर) की प्रक्रिया के लिए प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह कदम राज्य में कृषि और जैविक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि री-टेंडरिंग प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी और इसमें योग्य कंपनियों को सुविधा का संचालन करने का अवसर मिलेगा।
पराला CA फैसिलिटी का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट, विशेषकर पराली को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से प्रबंधित करना है। यह न केवल किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाता है, बल्कि पराली जलाने जैसी पर्यावरणीय हानिकारक प्रथाओं को भी रोकता है। हिमाचल प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ ही पराली प्रबंधन एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। इस नई सुविधा के जरिए प्रदेश सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान तलाश रही है।
अधिकारियों ने बताया कि री-टेंडर प्रक्रिया पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसमें योग्य कंपनियों को सुविधा संचालन का लाइसेंस प्राप्त होगा, और उन्हें तकनीकी एवं पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में प्रस्ताव की गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और पर्यावरणीय सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पिछले संचालन के दौरान पराला CA फैसिलिटी की कुछ समस्याओं के कारण यह बंद हो गई थी। अधिकारियों के अनुसार, री-टेंडरिंग के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा और सुविधाओं को पूर्ण रूप से सक्रिय किया जाएगा। इससे न केवल किसानों को बेहतर सेवा मिलेगी, बल्कि राज्य में अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा।
किसानों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पराली जलाने से उनकी फसलों और पर्यावरण को नुकसान होता था, और अब इस सुविधा के सक्रिय होने से उन्हें सुरक्षित विकल्प मिलेगा। इससे उनके लिए आय के नए स्रोत भी खुलेंगे।
हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग और पर्यावरण विभाग ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि री-टेंडरिंग के बाद सुविधा पूरी क्षमता से काम करे। उन्होंने बताया कि नए ठेकेदार को प्रशिक्षण और तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, नियमित निगरानी और पर्यावरणीय रिपोर्टिंग के जरिए संचालन में पारदर्शिता बनाए रखी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि पराली प्रबंधन की इस पहल से न केवल हिमाचल प्रदेश में स्वच्छता बढ़ेगी, बल्कि यह अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि अपशिष्ट का सही प्रबंधन किसानों, समाज और पर्यावरण सभी के हित में है।
आशा जताई जा रही है कि री-टेंडर प्रक्रिया के सफल होने के बाद पराला CA फैसिलिटी जल्द ही पूरी क्षमता से कार्य करने लगेगी और राज्य में कृषि अपशिष्ट प्रबंधन में एक स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस तरह हिमाचल प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि किसानों और स्थानीय समुदाय के लिए भी एक बड़ा लाभ साबित होगी।
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