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हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश ने ग्रामीण पेयजल सेवा को मजबूत करने के लिए केंद्र से किया समझौता
SHIDDHANT
20 March 2026 11:01 PM IST

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Shimla शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को ग्रामीण पेयजल सेवा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार से समझौता किया। इसके तहत नई दिल्ली में जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल वर्चुअली शामिल हुए। राज्य की ओर से सचिव (जल शक्ति विभाग) अभिषेक जैन उपस्थित थे, जबकि भारत सरकार की ओर से संयुक्त सचिव स्वाति नायक ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
जेजेएम 2.0 को दिसंबर 2028 तक लागू किया जाएगा। इसके लिए बजट बढ़ाया गया है और इसका ढांचा भी नया बनाया गया है, जिसका मुख्य जोर ग्रामीण पेयजल आपूर्ति क्षेत्र में ढांचागत सुधारों पर होगा। फिलहाल, सभी 'सिंगल विलेज स्कीम्स' (एसवीएस) को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें वे योजनाएं भी शामिल हैं, जिनके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही अग्रिम खर्च कर दिया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण हैं। इसकी तुलना दूसरे राज्यों से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य की लागत काफी ज्यादा होती है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दूसरे राज्यों पर लागू होने वाले नियम-कानून हिमाचल प्रदेश पर नहीं थोपे जाने चाहिए। राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं के जरिए जल आपूर्ति योजनाओं के प्रबंधन और वितरण को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र सरकार से जेजेएम के तहत बकाया 1,227 करोड़ रुपए की राशि जारी करने का भी आग्रह किया। उन्होंने बताया कि कई योजनाओं पर काम पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक उनका भुगतान जारी नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और जल शोधन के लिए उन्नत और आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में काम कर रही है। बढ़े हुए बजट के साथ दिसंबर 2028 तक 'जल जीवन मिशन' का विस्तार करने का उद्देश्य कार्यक्रम का पुनर्गठन और पुनर्संयोजन करना है, ताकि सुनिश्चित सेवा वितरण पर जोर दिया जा सके। इसमें कार्यक्षमता, पानी की गुणवत्ता, जल स्रोतों की निरंतरता और सामुदायिक स्वामित्व पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे जेजेएम 2.0 ग्रामीण पेयजल सेवाओं के लिए एक मजबूत और टिकाऊ राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित हो सकेगा।
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