हिमाचल प्रदेश

हिमाचल PCB ने आम जनता के लिए खर्च की जगह राशि बैंक में सुरक्षित रखी

Ratna Netam
24 April 2026 7:37 PM IST
हिमाचल PCB ने आम जनता के लिए खर्च की जगह राशि बैंक में सुरक्षित रखी
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HPPCB) पर सवाल उठ रहे हैं कि उसने 11.79 करोड़ रुपये के जुर्माने की रकम बैंकों में जमा कर रखी है, जबकि इसके तहत साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण कार्यों पर खर्च बेहद कम किया गया। अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि सीधे तौर पर राज्य में प्रदूषण नियंत्रण और साफ-सफाई कार्यों में लगाई जा सकती थी।
जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विभिन्न उद्योगों और संस्थानों पर लगाये गए जुर्मानों को बैंकों में सुरक्षित जमा कर रखा है। ये जुर्माने मुख्य रूप से पर्यावरण मानकों के उल्लंघन और प्रदूषण फैलाने वाले कार्यों के लिए लगाए गए थे। बावजूद इसके, प्रदूषण नियंत्रण और शहरों और कस्बों की सफाई के लिए अपेक्षित राशि में भारी कमी दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जुर्माने का उद्देश्य न केवल दंडित करना है, बल्कि उसे पर्यावरण सुधार और जागरूकता कार्यक्रमों में खर्च कर जनता और पर्यावरण के लिए फायदा पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि अगर यह राशि समय पर खर्च होती, तो शहरों में सफाई व्यवस्था और जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण में काफी मदद मिल सकती थी।
स्थानीय नागरिकों ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में कचरा ढेर हो गया है, नालियों और जलाशयों में गंदगी जमा हो रही है, और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति संतोषजनक नहीं है। नागरिकों का कहना है कि जुर्माने की रकम को पर्यावरण सुधार के लिए उपयोग करना चाहिए।
HPPCB के एक अधिकारी ने कहा कि राशि बैंकों में जमा कर सुरक्षित रखी गई है ताकि बड़े पैमाने पर पर्यावरण सुधार कार्यों के लिए योजनाबद्ध तरीके से निवेश किया जा सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन फंडों को विभिन्न प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं और सफाई अभियानों में लगाया जाएगा।
हालांकि, विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि पैसा जमा रखने के बजाय तुरंत प्रभावी योजनाओं और अभियान शुरू किए जाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए तत्काल कदम उठाना आवश्यक है।
इस स्थिति ने राज्य में प्रदूषण नियंत्रण और साफ-सफाई कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों और नागरिकों के बीच इस मुद्दे पर संवाद बढ़ाने की जरूरत है ताकि जुर्माने की राशि का अधिकतम लाभ पर्यावरण और समाज को पहुंच सके।
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