हिमाचल प्रदेश

Himachal पंचायत चुनाव: ऊना जिला परिषद में भाजपा को बड़ी बढ़त, 17 में से 11 वार्डों पर जीत

Kavita2
1 Jun 2026 11:58 AM IST
Himachal पंचायत चुनाव: ऊना जिला परिषद में भाजपा को बड़ी बढ़त, 17 में से 11 वार्डों पर जीत
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Himachal हिमाचल : हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के परिणाम सामने आने के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जिला परिषद चुनाव में ऊना जिले के सभी 17 वार्डों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल की है।

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला परिषद चुनाव परिणामों में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने 17 में से 11 वार्डों में जीत दर्ज की है। इस नतीजे को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन की पकड़ को देखते हुए।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को इन चुनावों में 5 वार्डों में सफलता मिली है। हालांकि पार्टी का प्रदर्शन भाजपा की तुलना में कमजोर रहा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में उसने अपनी मौजूदगी बनाए रखी है। चुनाव परिणामों से साफ है कि ग्रामीण स्तर पर भाजपा को अधिक समर्थन मिला है।

इसके अलावा धनेत वार्ड से एक निर्दलीय प्रत्याशी ने भी जीत हासिल की है। विजेता प्रत्याशी चंचला देवी पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर की करीबी मानी जाती हैं, जिससे इस सीट पर राजनीतिक समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं।

जिला परिषद के कुल परिणामों के बाद स्पष्ट हो गया है कि ऊना जिले में भाजपा का दबदबा कायम है। पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की बड़ी संख्या में जीत के चलते जिला परिषद में भाजपा का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे आगे के प्रशासनिक और विकास कार्यों में भी पार्टी की भूमिका अहम हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। पंचायत स्तर के ये नतीजे आमतौर पर जमीनी राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें बड़े चुनावों का संकेतक भी माना जाता है।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा गया, जबकि कांग्रेस खेमे में मंथन की स्थिति बनी हुई है। दोनों दल अब आने वाले चुनावी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, ऊना जिला परिषद चुनाव में भाजपा की स्पष्ट बढ़त ने राज्य की ग्रामीण राजनीति में पार्टी की स्थिति को मजबूत किया है, जबकि कांग्रेस को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने की जरूरत दिखाई दे रही है।

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