- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- Himachal : डाक सेवकों...
Himachal : डाक सेवकों की लापरवाही उजागर, कमरे से मिले महीनों पुराने रजिस्टर्ड पत्र और दस्तावेज

मंडी : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। चौंतड़ा डाकघर के अंतर्गत आने वाले गोलवां और जलपेहड़ क्षेत्र में तैनात दो डाक सेवकों पर आरोप है कि वे कागजों में ही डाक वितरण करते रहे, जबकि वास्तविकता में बड़ी संख्या में पत्र और जरूरी दस्तावेज महीनों तक लोगों तक नहीं पहुंचे। यह मामला तब सामने आया, जब दोनों डाक सेवक अपने किराये के कमरे में कथित तौर पर हुड़दंग मचा रहे थे।
जानकारी के अनुसार, दोनों डाक सेवक हरियाणा के रहने वाले हैं और चौंतड़ा डाकघर के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में डाक वितरण की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोप है कि उन्होंने अपने काम में गंभीर लापरवाही बरती और लोगों तक पहुंचने वाले महत्वपूर्ण पत्रों को वितरित नहीं किया।
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब उनके किराये के कमरे की जांच की गई। जांच के दौरान कमरे से बड़ी संख्या में सरकारी पत्र, रजिस्टर्ड डाक, आधार कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। इनमें कई पत्र ऐसे थे, जो करीब चार महीने पुराने बताए जा रहे हैं और अब तक संबंधित लोगों तक नहीं पहुंच पाए थे।
बरामद दस्तावेजों में स्थानीय विधायक के नाम आए रजिस्टर्ड पत्र भी शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा सरकारी विभागों से जुड़े पत्र और आम लोगों के जरूरी दस्तावेज भी कमरे में पड़े मिले। इन दस्तावेजों की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे लंबे समय से बिना वितरण के रखे हुए थे।
घटना सामने आने के बाद डाक विभाग में भी हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में डाक वितरण व्यवस्था में लापरवाही के संकेत मिले हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि कितने लोगों की डाक प्रभावित हुई और कितने महत्वपूर्ण दस्तावेज समय पर नहीं पहुंच पाए।
डाक सेवा आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खासकर सरकारी पत्र, बैंक से जुड़े दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य जरूरी कागजात समय पर पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में महीनों तक डाक का रुका रहना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार उन्हें जरूरी पत्र और दस्तावेज समय पर नहीं मिलने की शिकायत रही होगी, लेकिन इस स्तर की लापरवाही का पता अब जाकर चला। लोगों ने मांग की है कि दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
डाक विभाग के अधिकारियों ने बरामद दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन पत्रों को रिकॉर्ड में वितरित दिखाया गया था या नहीं। यदि रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज की गई है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, डाक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जांच की जा रही है। प्रभावित लोगों तक दस्तावेज पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि डाक सेवकों पर लोगों के विश्वास की बड़ी जिम्मेदारी होती है। डाक विभाग की सेवाओं पर निर्भर रहने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए समय पर पत्र और दस्तावेज मिलना बेहद आवश्यक है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। विभाग यह भी सुनिश्चित करने में जुटा है कि बरामद सभी जरूरी दस्तावेज संबंधित लोगों तक जल्द पहुंचाए जा सकें।
इस घटना ने डाक वितरण प्रणाली में निगरानी और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग की कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।





