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शिमला : हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य के कई जिलों में सामान्य से कई गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे भूस्खलन, जलभराव और सड़क अवरुद्ध होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। लगातार बिगड़ते मौसम के बीच विभिन्न घटनाओं में तीन और लोगों की मौत हो गई है। इसके साथ ही इस मानसून सीजन में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गई। सोलन में सामान्य से 870 प्रतिशत, सिरमौर में 743 प्रतिशत और शिमला में 669 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इतनी अधिक वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
लगातार बारिश से राज्य की कई सड़कें जलमग्न हो गईं, जबकि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाओं के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर मलबा और चट्टानें सड़क पर गिरने से आवाजाही बाधित रही। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें रास्ते खोलने के लिए लगातार राहत कार्यों में जुटी हैं।
भारी वर्षा के कारण लोगों को आवागमन, बिजली और दैनिक कार्यों में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
इस बीच, कुल्लू जिले में हुई एक दर्दनाक घटना में आनी उपमंडल के घलाडनाला क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा गिरने के दौरान एक बुजुर्ग की जान चली गई। मृतक की पहचान 70 वर्षीय शिव राम के रूप में हुई है, जो धोगीधार गांव के निवासी थे। जानकारी के अनुसार, वह अपने घर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित च्वाई बाजार की ओर पैदल जा रहे थे। इसी दौरान अचानक पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने लगे। एक बड़ा पत्थर उनके सिर पर लग गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र में ही एक अन्य घटना में 62 वर्षीय व्यक्ति की भी मौत हो गई। बताया गया कि वह बकरियां चराने के लिए पहाड़ी क्षेत्र में गए थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरी ढांक (खाई) में गिर गए। गंभीर चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
राज्य में एक अन्य घटना में भी एक व्यक्ति की जान चली गई, जिससे विभिन्न घटनाओं में शुक्रवार को मृतकों की संख्या तीन हो गई। प्रशासन ने संबंधित मामलों में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
वहीं हाल ही में हुई एक भूस्खलन की घटना में पांच लोग घायल हो गए। घायलों को तत्काल स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, सभी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने जिला प्रशासनों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और राहत एवं बचाव दलों को आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करना चाहिए और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।
प्रशासन ने पर्यटकों से भी अपील की है कि वे मौसम की ताजा जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करें। पर्वतीय मार्गों पर विशेष सावधानी बरतने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल हिमाचल प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और लगातार हो रही बारिश ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया है। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, जबकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की सलाह दी है। राज्य में मानसून के दौरान अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।





