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हिमाचल प्रदेश
Himachal HC ने बरोट में मार्च से पहले गाद निकालने पर रोक लगाई
Payal
17 April 2026 2:36 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बरोट क्षेत्र में हर साल मार्च से पहले नदी की गाद (silt) निकालने की प्रक्रिया पर रोक लगाने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने इसे पर्यावरण और जलजीवों, विशेषकर ट्राउट मछली के प्राकृतिक आवास के लिए गंभीर खतरा बताते हुए यह फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनियंत्रित गाद निकासी से नदी का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे जलधाराओं में “रेत का तूफ़ान” जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। इससे न केवल पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि जलीय जीवन भी गंभीर रूप से नुकसान झेल रहा है।
बरोट क्षेत्र, जो अपनी ट्राउट मछली पालन और प्राकृतिक जलधाराओं के लिए प्रसिद्ध है, वहां पिछले कुछ वर्षों में गाद निकालने की गतिविधियां बढ़ी हैं। इस कारण मछलियों के प्रजनन क्षेत्र और प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अब हर साल मार्च से पहले किसी भी प्रकार की डीसिल्टिंग गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक जलधाराओं का संतुलन बना रहे।
अदालत ने ट्राउट मछली की आबादी को पुनर्स्थापित करने के लिए मुआवज़ा और पुनर्वास योजनाएं लागू करने का भी आदेश दिया है। इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में मछली संरक्षण और पुनः प्रजनन कार्यक्रम चलाने पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्राउट मछली हिमालयी जल पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी कमी से पूरे इकोसिस्टम पर असर पड़ सकता है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए कड़े कदम आवश्यक हैं।
पर्यावरणविदों ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह आदेश प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि यदि समय रहते ऐसे कदम नहीं उठाए गए, तो कई नदियों का पारिस्थितिक तंत्र खतरे में पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गाद निकासी के कारण नदी का स्वरूप बदल रहा था और जलजीवों की संख्या में कमी देखी जा रही थी। कोर्ट के इस आदेश से उन्हें उम्मीद है कि प्राकृतिक संतुलन फिर से बहाल होगा।
प्रशासन को अब इस आदेश के पालन की जिम्मेदारी दी गई है और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कुल मिलाकर, हिमाचल हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सख्त कदम है, बल्कि यह ट्राउट मछली जैसे संवेदनशील जलीय जीवों के संरक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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