हिमाचल प्रदेश

हिमाचल सरकार फिर लेगी 700 करोड़ का ऋण, 13 साल में चुकाएगी; 7.56% ब्याज दर तय

Kavita2
30 Aug 2026 11:35 AM IST
हिमाचल सरकार फिर लेगी 700 करोड़ का ऋण, 13 साल में चुकाएगी; 7.56% ब्याज दर तय
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शिमला। वित्तीय दबाव से गुजर रही हिमाचल प्रदेश सरकार एक बार फिर बाजार से 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है। प्रदेश के वित्त विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का कहना है कि यह ऋण विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए लिया जा रहा है।

वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार के अनुसार, ऋण लेने की प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए आरबीआई के मुंबई कार्यालय की ओर से पहली सितंबर 2026 को ई-कुबेर पोर्टल पर नीलामी आयोजित की जाएगी।

700 करोड़ के ऋण के लिए होगी नीलामी

राज्य सरकार ने बाजार से ऋण लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के माध्यम से 700 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।

वित्त विभाग ने बताया कि यह ऋण सरकार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। इसमें विकास परियोजनाओं को गति देना और सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराना शामिल है।

सरकार समय-समय पर बाजार से ऋण लेकर अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करती है। इसी प्रक्रिया के तहत यह नया ऋण लिया जा रहा है।

13 वर्ष की अवधि के लिए लिया जाएगा ऋण

अधिसूचना के अनुसार, हिमाचल सरकार यह 700 करोड़ रुपये का ऋण 13 वर्ष की अवधि के लिए लेगी। ऋण की राशि को आठ जुलाई 2039 को चुकता किया जाएगा।

सरकार को इस ऋण पर निर्धारित अवधि तक ब्याज का भुगतान करना होगा। ऋण की अवधि लंबी होने के कारण सरकार पर लंबे समय तक वित्तीय जिम्मेदारी बनी रहेगी।

ब्याज दर 7.56 प्रतिशत तय

इस ऋण पर 7.56 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज देय होगा। ब्याज का भुगतान छमाही आधार पर किया जाएगा।

अधिसूचना के मुताबिक, ब्याज भुगतान प्रत्येक वर्ष आठ जनवरी और आठ जुलाई को किया जाएगा। यानी सरकार को साल में दो बार ब्याज की राशि का भुगतान करना होगा।

वित्तीय दबाव के बीच सरकार का कदम

हिमाचल प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। राज्य पर बढ़ते खर्च, कर्मचारियों के वेतन-पेंशन दायित्व और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के संचालन के कारण वित्तीय दबाव बना हुआ है।

ऐसे में सरकार को विकास कार्यों और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ रही है। बाजार से ऋण लेना इसी वित्तीय प्रबंधन का हिस्सा बताया जा रहा है।

विकास योजनाओं पर खर्च होगा पैसा

सरकार का कहना है कि ऋण से जुटाई गई राशि का उपयोग विकास कार्यों और जनहित से जुड़ी योजनाओं के संचालन में किया जाएगा।

राज्य सरकार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे और अन्य क्षेत्रों में कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के लिए नियमित वित्तीय संसाधनों की जरूरत होती है।

सरकार का दावा है कि ऋण राशि का उपयोग राज्य के विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।

आरबीआई के माध्यम से पूरी होगी प्रक्रिया

सरकारी ऋण लेने की प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से पूरी की जाएगी। आरबीआई के मुंबई कार्यालय में ई-कुबेर पोर्टल के जरिए नीलामी आयोजित होगी।

ई-कुबेर आरबीआई का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

विपक्ष उठा सकता है सवाल

सरकार के इस नए ऋण लेने के फैसले पर राजनीतिक बहस भी शुरू हो सकती है। विपक्ष पहले भी राज्य की बढ़ती देनदारियों और वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है।

विपक्ष का तर्क रहा है कि सरकार को खर्चों में कटौती और वित्तीय प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं को जारी रखने के लिए ऋण लेना आवश्यक है।

आर्थिक प्रबंधन बनी बड़ी चुनौती

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए सीमित राजस्व स्रोतों के बीच विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को संचालित करना चुनौतीपूर्ण रहता है।

सरकार के सामने एक ओर लोगों की जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते कर्ज को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।

700 करोड़ रुपये का यह नया ऋण राज्य सरकार की वित्तीय रणनीति का हिस्सा है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस राशि का उपयोग किस तरह करती है और इससे राज्य के विकास कार्यों को कितना लाभ मिलता है।

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