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हिमाचल प्रदेश
लावारिस पशुओं की देखभाल में Himachal सरकार सक्रिय
Ratna Netam
6 April 2026 12:41 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में लावारिस पशुओं के कल्याण के लिए कुल 14 करोड़ रुपये खर्च किए। यह राशि मुख्य रूप से प्रदेश के विभिन्न जिलों में छोड़े गए और उपेक्षित पशुओं की देखभाल, स्वास्थ्य जांच और भोजन उपलब्ध कराने में लगाई गई। पशु कल्याण विभाग ने इस दिशा में कई पहलें शुरू की हैं, जिससे इन पशुओं की स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह राशि पशु आश्रयों के संचालन, इलाज, टीकाकरण और सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं के लिए विशेष अभियान पर खर्च की गई। विभाग ने बताया कि पिछले वर्ष कई जिलों में पशु जागरूकता अभियान भी चलाए गए, जिससे लोगों में इन पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी।
विशेषज्ञों का कहना है कि लावारिस पशुओं की देखभाल में सरकारी निवेश बढ़ना जरूरी है, क्योंकि यह न केवल उनके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है, बल्कि मानव-जानवर संघर्ष को भी कम करता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क हादसे और पशुओं की उपेक्षा आम समस्या है, इसलिए ऐसे बजट और योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पशु कल्याण विभाग ने बताया कि राज्य में कुल 30 से अधिक पशु आश्रय केंद्र सक्रिय हैं, जो इन फंडों से संचालित होते हैं। इनमें विशेष रूप से बेजान, घायल और लावारिस पशुओं का इलाज और उनका आश्रय सुनिश्चित किया जाता है। इसके साथ ही, समाजसेवी संस्थाओं और एनजीओ के सहयोग से भी कई अभियान चलाए गए हैं।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में 14 करोड़ रुपये के खर्च से लगभग 25,000 पशुओं को लाभ मिला। इनमें इलाज, टीकाकरण, भोजन और सुरक्षित आश्रय शामिल हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आगामी वर्ष में इस बजट में और वृद्धि की संभावना है, ताकि अधिक से अधिक पशुओं को सुरक्षित रखा जा सके।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम राज्य में पशु कल्याण के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। उनका कहना है कि आगे भी ऐसे निवेश और जागरूकता अभियान जारी रहने चाहिए, ताकि सड़क पर घूमते और लावारिस पशुओं को बेहतर जीवन मिले।
हिमाचल प्रदेश सरकार की यह योजना न केवल पशुओं के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पर्यटन क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोग ऐसे प्रदेशों में आने को अधिक सुरक्षित और आकर्षक समझते हैं, जहां जानवरों के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है।
कुल मिलाकर, पिछले वित्त वर्ष में 14 करोड़ रुपये का खर्च हिमाचल प्रदेश में लावारिस पशुओं की स्थिति सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। आने वाले समय में इस दिशा में और योजनाओं की आवश्यकता बनी हुई है, ताकि राज्य में हर पशु सुरक्षित और संरक्षित महसूस कर सके।
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