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हिमाचल प्रदेश
हिमाचल: चार अंग नहीं होने पर भी दिव्यांगता सिर्फ 80 प्रतिशत
Kiran
22 Oct 2026 2:47 PM IST

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सिरमौर जिले के शिलाई विधानसभा क्षेत्र की दूर-दराज कोदगा पंचायत के खानलोग गांव के सोमदत्त, जो बिना हाथ-पैर के पैदा हुए हैं और अपनी रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर हैं, उन्हें मेडिकल बोर्ड ने केवल 80 प्रतिशत विकलांग माना है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या विकलांगता का यह वर्गीकरण उनकी वास्तविक स्थिति को सही ढंग से दर्शाता है। खुद से खाना खाने या कहीं आने-जाने में असमर्थ सोमदत्त अपनी रोजमर्रा की देखभाल के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। इसके बावजूद, उन्हें 100 प्रतिशत विकलांगता की श्रेणी में नहीं रखा गया है, जबकि राज्य सरकार के संशोधित नियमों के तहत इस श्रेणी में आने वालों को 3,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलती है। कल्याण विभाग के एक सूत्र ने पुष्टि की है कि सोमदत्त 80 प्रतिशत विकलांगता की श्रेणी में आते हैं। नतीजतन, उन्हें बढ़ी हुई पेंशन के बजाय हर महीने 1,700 रुपये ही मिल रहे हैं। गरीबी, विकलांगता और बीमारी से जूझ रहे परिवार के लिए हर महीने 1,300 रुपये का यह अंतर बहुत मायने रखता है।
हालांकि विकलांगता का प्रतिशत तय करने के लिए कुछ मेडिकल मानक होते हैं, लेकिन जो व्यक्ति चारों अंगों के बिना पैदा हुआ हो, उसे 80 प्रतिशत विकलांग मानने के आधार की संबंधित अधिकारियों द्वारा समीक्षा की जानी चाहिए। सिरमौर के सीएमओ डॉ. राकेश प्रताप ने कहा, "विकलांगता का प्रतिशत मेडिकल बोर्ड तय करता है, जिसकी सिफारिश पर सीएमओ विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करते हैं। इस बोर्ड के प्रमुख मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट होते हैं और संबंधित विभागों के डॉक्टर इसके सदस्य होते हैं। केवल मेडिकल बोर्ड ही यह तय कर सकता है कि सोमदत्त की 80 प्रतिशत विकलांगता का आकलन सही है या इसमें बदलाव की जरूरत है।"
जब सोमदत्त के मामले के बारे में पूछा गया, तो नाहन स्थित डॉ. वाई.एस. परमार गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. रेनू चौहान ने कहा कि विकलांगता प्रतिशत के बारे में सिफारिशें मेडिकल बोर्ड में शामिल संबंधित विभागों के डॉक्टर करते हैं और ये सीधे सीएमओ को भेज दी जाती हैं। उन्होंने कहा, "इस प्रक्रिया में मेरी भूमिका बहुत सीमित है।"
हालांकि, एक सेवानिवृत्त ऑर्थोपेडिक डॉक्टर, जो कई वर्षों तक ऐसे मेडिकल बोर्ड के प्रमुख रहे हैं, ने स्पष्ट रूप से कहा कि सोमदत्त को 100 प्रतिशत विकलांगता की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "जिस व्यक्ति की जांघ के पास से एक पैर कटा हुआ हो, वह भी 80 प्रतिशत विकलांगता की श्रेणी में आता है। जो व्यक्ति बिना दोनों हाथों और दोनों पैरों के पैदा हुआ हो, वह 100 प्रतिशत विकलांगता की श्रेणी में आता है।"
सरकार ने 100 प्रतिशत विकलांगता वाले लाभार्थियों के लिए बढ़ी हुई पेंशन को मंजूरी दे दी है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी; साथ ही उन्हें बकाया राशि (एरियर) भी मिलेगी। कल्याण विभाग ने सोमदत्त की सितंबर 2026 तक की पेंशन, बकाया राशि के साथ जारी कर दी है, जो 1,700 रुपये प्रति माह की दर से है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए सब्सिडी वाला राशन आसानी से मिल सके और कल्याणकारी लाभ पाने में आगे कोई दिक्कत न आए, इसके लिए उनका आधार KYC भी शुरू कर दिया गया है।
उनका छोटा भाई, संदीप भी विकलांग है। हालांकि उसके चारों अंग मौजूद हैं, लेकिन वे काम नहीं करते हैं। उसे विकलांगता पेंशन के रूप में हर महीने 1,700 रुपये मिलते हैं। उनकी माँ, जो दोनों बेटों की देखभाल करती हैं, कैंसर से पीड़ित हैं और शिमला में उनका इलाज चल रहा है। उन्हें 'सहारा योजना' के तहत हर महीने 3,000 रुपये मिलते हैं। सोमदत्त का मामला यह बताता है कि अधिकारियों को उनके विकलांगता मूल्यांकन की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पात्र लाभार्थियों को नियमों के अनुसार मिलने वाली सहायता मिल सके।
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