हिमाचल प्रदेश

राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में हिमाचल कांग्रेस का लोकभवन के बाहर प्रदर्शन

Kavita2
7 Oct 2026 1:24 PM IST
राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में हिमाचल कांग्रेस का लोकभवन के बाहर प्रदर्शन
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शिमला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के विरोध में हिमाचल कांग्रेस ने बुधवार को शिमला स्थित लोकभवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, कई कैबिनेट मंत्री, विधायक, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

दिल्ली में एक दिन पहले INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद मार्ग से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की कोशिश की थी। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों पर विरोध जता रहे थे। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन के पास धरने पर बैठ गए। कई घंटे चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

इसी कार्रवाई के विरोध में हिमाचल कांग्रेस ने शिमला में लोकभवन के बाहर प्रदर्शन का आयोजन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए दिल्ली में हुई हिरासत की कार्रवाई की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसदों को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सुक्खू ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है; दिल्ली पुलिस का कहना था कि प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था और प्रतिबंधात्मक आदेशों के मद्देनजर रोका गया था।

सुक्खू ने कहा कि यह मामला केवल कुछ जनप्रतिनिधियों को हिरासत में लेने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार यह संविधान, असहमति और जनता की आवाज से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और असहमति को दबाने के बजाय उसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिन लोगों से जवाबदेही मांगी जानी चाहिए, उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है और जो लोग जनता की आवाज उठा रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना कैसे मजबूत होगी।

हिमाचल कांग्रेस के इस प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरने में हिस्सा लिया। कई मंत्रियों और विधायकों ने दिल्ली की घटना को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों पर चुनाव आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर चुनाव आयोग और भाजपा कांग्रेस के आरोपों से असहमति जताते रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते रहे हैं।

दिल्ली में मंगलवार को हुए प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पुलिस बैरिकेड पार करने की कोशिश की थी। इसके बाद कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए और वहीं धरना दिया। दिल्ली पुलिस ने शाम को कार्रवाई कर उन्हें हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।

हिमाचल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लेकर राज्यभर में राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने कहा कि जब देश की संसद में नेता प्रतिपक्ष और सांसदों को विरोध दर्ज कराने से रोका जाता है तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने हाथों में पार्टी के झंडे और तख्तियां लेकर नारे लगाए। लोकभवन के आसपास सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जुटने के कारण इलाके में पुलिस बल तैनात रहा।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि विरोध करना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने भी कहा कि यह प्रदर्शन केवल दिल्ली में राहुल गांधी की हिरासत के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर पार्टी की व्यापक चिंता का हिस्सा है।

दिल्ली में विपक्षी दलों का प्रदर्शन SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में हुआ था। विपक्षी दल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर राजनीतिक और संस्थागत मतभेद बने हुए हैं।

हिमाचल कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरती रहेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक रूप से सक्रिय रहने और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लोगों के बीच जाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संवाद, जवाबदेही और असहमति के लिए जगह होना जरूरी है। उनके अनुसार विपक्ष को सवाल उठाने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।

दूसरी ओर दिल्ली पुलिस और सरकारी पक्ष का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था और तय नियमों के अनुसार की गई थी। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका था और बाद में लंबे धरने के बाद हिरासत में लिया गया। राहुल गांधी और अन्य नेताओं को बाद में रिहा कर दिया गया।

फिलहाल दिल्ली की घटना को लेकर राजनीतिक टकराव राज्यों तक पहुंच गया है। हिमाचल कांग्रेस का शिमला में हुआ प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा है। मुख्यमंत्री सुक्खू समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस ने आगे भी इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।

बुधवार का धरना-प्रदर्शन हिमाचल कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा गया। पार्टी ने साफ किया कि वह असहमति, चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती रहेगी।

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