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Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : सोलन नगर निगम में भाजपा ने बहुमत के आधार पर कब्जा जमा लिया है। लंबे राजनीतिक खींचतान और चुनावी प्रक्रिया के बाद भाजपा की तीन बार की पार्षद सुषमा शर्मा को नगर निगम सोलन का नया मेयर चुना गया है। उनके चयन के साथ ही नगर निगम की सत्ता भाजपा के हाथों में आ गई है।
नगर निगम सोलन में कुल 17 पार्षद हैं, जिनमें से 10 भाजपा के पार्षद हैं और एक निर्दलीय पार्षद ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया। इस प्रकार कुल 11 मत सुषमा शर्मा के समर्थन में पड़े, जिससे उनकी जीत सुनिश्चित हो गई। वहीं, कांग्रेस के छह पार्षद इस चुनाव में विपक्ष में रहे।
जानकारी के अनुसार, 29 जून को नगर निगम में महापौर और उपमहापौर के चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन उस समय कोरम पूरा न होने के कारण चुनाव को स्थगित करना पड़ा था। इसके बाद दोबारा चुनाव प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें बहुमत के आधार पर भाजपा ने बढ़त हासिल कर ली।
मेयर पद के लिए कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया था। उन्हें कांग्रेस के पार्षदों के साथ-साथ एक विधायक के वोट का भी समर्थन मिला, जिससे उन्हें कुल सात मत प्राप्त हुए। हालांकि यह संख्या भाजपा के बहुमत के सामने पर्याप्त नहीं रही और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सोलन नगर निगम में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। भाजपा की जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब स्थानीय निकायों में सत्ता संतुलन पर नजर बनी हुई है।
वहीं उपमहापौर (डिप्टी मेयर) के चुनाव में भी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। इस पद पर भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ रहे निर्दलीय उम्मीदवार गौरव राजपूत ने जीत हासिल की है। उनके चुनाव को स्थानीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
गौरव राजपूत के समर्थन में पार्षदों ने खुलकर मतदान किया, जिससे उन्हें बहुमत प्राप्त हुआ। उनकी जीत ने नगर निगम की राजनीति में एक नया समीकरण भी खड़ा कर दिया है।
भाजपा नेताओं ने सुषमा शर्मा के मेयर चुने जाने को विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। पार्टी का कहना है कि अब नगर निगम में विकास कार्यों को गति दी जाएगी और जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।
वहीं कांग्रेस ने चुनाव परिणाम को लेकर निराशा जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे और नगर निगम में विपक्ष की भूमिका निभाते रहेंगे।
नगर निगम सोलन का यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा था, क्योंकि इसमें स्थानीय स्तर पर सत्ता का संतुलन बदलने की संभावना थी। अब भाजपा के बहुमत में आने के बाद आगामी विकास योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोलन नगर निगम का यह चुनाव आने वाले समय में स्थानीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। पार्षदों के बदलते समर्थन और गठबंधन की राजनीति ने इस चुनाव को और भी रोचक बना दिया।
फिलहाल सुषमा शर्मा के मेयर बनने के बाद नगर निगम में प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भाजपा के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में शहर के विकास और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।





