हिमाचल प्रदेश

Himachal: नारी शक्ति बिल पर बीजेपी का कांग्रेस पर हमला

Ratna Netam
23 April 2026 3:35 PM IST
Himachal: नारी शक्ति बिल पर बीजेपी का कांग्रेस पर हमला
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में हाल ही में पेश किए गए नारी शक्ति बिल के विरोध को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उनका विरोध “महिला विरोधी मानसिकता” का प्रतीक है। बीजेपी का कहना है कि यह बिल महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन कांग्रेस इसे रोकने का प्रयास कर रही है।
बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा कि नारी शक्ति बिल महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा और उनके सामाजिक व आर्थिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस बिल का विरोध कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में रोक लगाने का काम किया।
बीजेपी के नेता ने बताया कि बिल में महिलाओं को घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और अन्य सामाजिक चुनौतियों से सुरक्षा देने के उपाय शामिल हैं। “हमारा मानना है कि हर महिला को समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए। कांग्रेस का विरोध इस दिशा में बाधा डाल रहा है,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया में पार्टी ने दावा किया कि बिल में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिन पर विचार और संशोधन की जरूरत है। पार्टी का कहना है कि उनका विरोध महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून की पूर्णता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नारी शक्ति बिल जैसे कानून समाज में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना आम है, लेकिन जनता और महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए सहयोग की आवश्यकता है।
बीजेपी ने अपने बयान में यह भी कहा कि कांग्रेस का विरोध केवल राजनीतिक दृष्‍टिकोण से नहीं, बल्कि महिलाओं के विकास और सुरक्षा के हित में नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। पार्टी ने हिमाचल सरकार से अपील की है कि बिल को शीघ्र पारित किया जाए और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।
हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के मुद्दे पर यह विवाद आगामी चुनावी रणनीतियों और सियासी बहसों में भी एक महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है। दोनों पार्टियों के इस मामले में बयानबाजी से यह स्पष्ट होता है कि नारी शक्ति बिल केवल कानून ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और लैंगिक समानता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
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