हिमाचल प्रदेश

मोटरसाइकिल दुर्घटना मामले में हाई कोर्ट का फैसला, बीमा कंपनी की देनदारी बरकरार

nidhi
3 Nov 2026 10:00 AM IST
मोटरसाइकिल दुर्घटना मामले में हाई कोर्ट का फैसला, बीमा कंपनी की देनदारी बरकरार
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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के मुआवजा दावे से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि केवल चालक के पास लर्निंग लाइसेंस होने के आधार पर बीमा कंपनी भुगतान की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए मुआवजे की देनदारी बरकरार रखी। अदालत ने मुआवजा राशि ₹33,97,440 से बढ़ाकर ₹34,03,030 कर दी।
इस फैसले में मुआवजे की राशि में ₹5,590 की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, उपलब्ध समाचार विवरण में बढ़ोतरी की गणना का विस्तृत आधार नहीं दिया गया है। आदेश की पूरी प्रति उपलब्ध नहीं होने के कारण दुर्घटना की तारीख, दावेदारों की पहचान, ब्याज दर और भुगतान की समयसीमा जैसे विवरणों की पुष्टि नहीं की जा सकी है।
मामले में बीमा कंपनी का मुख्य तर्क था कि दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल चालक के पास केवल लर्निंग लाइसेंस था। कंपनी ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया और इसे बीमा पॉलिसी की शर्तों का मूल उल्लंघन बताया। अदालत ने संबंधित मामले में यह दलील स्वीकार नहीं की। रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा कि लर्निंग लाइसेंस धारक को वैध लाइसेंस से रहित व्यक्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 24(3)(v) का विश्लेषण भी किया। खबर में मोटरसाइकिल प्रशिक्षण के संदर्भ में दोहरे नियंत्रण वाले वाहन और प्रशिक्षक की मौजूदगी संबंधी प्रावधान पर अदालत की व्याख्या का उल्लेख है। हालांकि, इस व्याख्या का पूरा संदर्भ समझने के लिए मूल न्यायिक आदेश देखना आवश्यक है। इसे सभी वाहनों और सभी परिस्थितियों में अकेले वाहन चलाने की सामान्य अनुमति के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
लर्निंग लाइसेंस की कानूनी मान्यता और उसके इस्तेमाल की शर्तें अलग-अलग प्रश्न हैं। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम तीन में वाहन चलाना सीखने वाले व्यक्ति के लिए प्रभावी लर्नर लाइसेंस, प्रशिक्षक और वाहन पर पहचान चिह्न से संबंधित शर्तें दी गई हैं। इनमें वाहन के आगे और पीछे सफेद पृष्ठभूमि पर लाल रंग का ‘एल’ लगाने का प्रावधान भी शामिल है। मोटरसाइकिल पर किसी अन्य व्यक्ति को बैठाने को लेकर भी विशेष शर्त है। इसलिए खबर का केंद्रीय निष्कर्ष संबंधित मुआवजा मामले तक सीमित रखना जरूरी है। हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की उस आपत्ति को स्वीकार नहीं किया, जिसके आधार पर वह भुगतान की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहती थी। इसका अर्थ यह नहीं है कि लर्निंग लाइसेंस और स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस की सभी शर्तें एक जैसी हो गई हैं अथवा सीखने वाले चालक को यातायात नियमों से छूट मिल गई है।
वाहन चलाना सीख रहे लोगों को अपने लाइसेंस की वैधता, अधिकृत वाहन श्रेणी और लागू नियमों का पालन करना चाहिए। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के दस्तावेज में भी लर्नर लाइसेंस धारक का ध्यान नियम तीन की शर्तों और वाहन के आगे-पीछे ‘एल’ प्लेट लगाने की आवश्यकता की ओर दिलाया गया है। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में पूरी मुआवजा राशि चुकाने की जिम्मेदारी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी पर बनी रहेगी। फैसले की व्यापक कानूनी उपयोगिता का आकलन मूल आदेश और मामले के तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल पुष्टि योग्य बात यह है कि हाई कोर्ट ने कंपनी की अपील खारिज की और मुआवजा बढ़ाकर लगभग ₹34.03 लाख किया।
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