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शिमला में भारी भूस्खलन से मचा हड़कंप, सुंदरू खड्ड का बहाव रुका; खतरे की आशंका बढ़ी

शिमला: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में भारी बारिश के बीच भूस्खलन की एक भयावह घटना सामने आई है। रोहड़ू उपमंडल के दूरदराज गांव जांगलिख में अचानक पहाड़ का बड़ा हिस्सा दरक गया। भारी मात्रा में मलबा गिरने से सुंदरू खड्ड का पानी रुक गया है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में खतरे की आशंका बढ़ गई है।
भूस्खलन का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है।
पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरका
जानकारी के अनुसार, जांगलिख गांव में बारिश के दौरान अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया। भारी भूस्खलन के कारण मलबा सीधे सुंदरू खड्ड में गिर गया।
मलबे की बड़ी मात्रा जमा होने से खड्ड का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हो गया है। इससे पानी रुकने की स्थिति बन गई है, जो आने वाले समय में परेशानी का कारण बन सकती है।
खड्ड का बहाव रुकने से खतरा
स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता का मुख्य कारण सुंदरू खड्ड का पानी रुकना है। मलबा जमा होने से यदि पानी लगातार बढ़ता रहा तो दबाव बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में अचानक पानी का बहाव तेज होने या आसपास के इलाकों में नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
रास्तों पर आवाजाही प्रभावित
भूस्खलन के कारण क्षेत्र में कई रास्तों पर भी असर पड़ा है। मलबा गिरने और सड़कें प्रभावित होने से लोगों की आवाजाही में परेशानी आ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
कई पेड़ जड़ से उखड़े
भूस्खलन की चपेट में आने से कई पेड़ भी जड़ समेत उखड़ गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र में हुए इस नुकसान से इलाके में प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति पैदा हुई है।
मलबा और पेड़ों के गिरने से आसपास के क्षेत्र में खतरा और बढ़ गया है।
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
जांगलिख और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि खड्ड का बहाव रुकना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
लोगों को डर है कि यदि पानी जमा होता गया तो अचानक टूटने की स्थिति में निचले इलाकों को नुकसान पहुंच सकता है।
प्रशासन की निगरानी जारी
भूस्खलन की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। क्षेत्र में हालात का जायजा लिया जा रहा है और संभावित खतरे को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
बारिश और खराब मौसम के कारण राहत एवं निगरानी कार्यों में भी चुनौतियां आ रही हैं।
हिमाचल में बारिश से बढ़ी मुश्किलें
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। भारी बारिश के कारण पहाड़ कमजोर हो जाते हैं, जिससे चट्टानों के खिसकने और रास्ते बंद होने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
शिमला जिले में भी कई क्षेत्रों में बारिश के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। खड्डों, नदियों और कमजोर पहाड़ी इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
आगे की स्थिति पर नजर
फिलहाल जांगलिख में हुए भूस्खलन के बाद प्रशासन और स्थानीय लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता सुंदरू खड्ड के रुके हुए बहाव को लेकर है।
यदि मलबा हटाने और पानी के सुरक्षित निकासी की व्यवस्था समय पर नहीं हुई तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई और स्थिति की निगरानी जारी है।





