हिमाचल प्रदेश

स्वास्थ्य अध्ययन में खुलासा, हिमाचल में गंभीर बीमारियां बनीं मौत की बड़ी वजह

Kavita2
14 July 2026 11:11 AM IST
स्वास्थ्य अध्ययन में खुलासा, हिमाचल में गंभीर बीमारियां बनीं मौत की बड़ी वजह
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शिमला : हिमाचल प्रदेश में बढ़ती गैर संचारी बीमारियां स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि प्रदेश में होने वाली कुल मौतों में 67.83 प्रतिशत मौतें हृदयाघात, स्ट्रोक, कैंसर, सीओपीडी और अन्य गैर संचारी रोगों के कारण हो रही हैं। यानी हर तीन में से लगभग दो मौतें इन गंभीर बीमारियों से जुड़ी हैं।

यह अध्ययन मुख्यमंत्री निरोग योजना के क्रियान्वयन का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया था। अध्ययन में यह भी सामने आया कि योजना के तहत बनाए गए इंटीग्रेटेड निरोग क्लीनिक की कार्यप्रणाली और दिशा-निर्देशों को लेकर कई स्वास्थ्य कर्मियों में पर्याप्त जानकारी का अभाव है। इसका असर योजना के प्रभावी संचालन और मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर पड़ रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा किया गया यह अध्ययन इस वर्ष जर्नल ऑफ कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2024 के दौरान हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का मूल्यांकन किया। अध्ययन के लिए प्रदेश के 51 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, 132 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और 2,748 लाभार्थियों को शामिल किया गया।

अध्ययन का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री निरोग योजना के तहत गैर संचारी रोगों की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपचार व्यवस्था की स्थिति का आकलन करना था। शोध में यह जानने का प्रयास किया गया कि योजना का लाभ आम लोगों तक किस स्तर तक पहुंच रहा है और स्वास्थ्य संस्थानों में इसकी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

अध्ययन में पाया गया कि गैर संचारी रोग हिमाचल प्रदेश में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुके हैं। बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतों, बढ़ते तनाव और उम्र से जुड़ी समस्याओं के कारण हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर जांच, जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य निगरानी बेहद जरूरी है। यदि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

मुख्यमंत्री निरोग योजना का उद्देश्य भी गैर संचारी रोगों की रोकथाम और समय रहते मरीजों की पहचान करना है। इसके तहत स्वास्थ्य संस्थानों में स्क्रीनिंग, परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, अध्ययन में सामने आया कि जमीनी स्तर पर योजना के संचालन में कई चुनौतियां मौजूद हैं। कई स्वास्थ्य कर्मियों को इंटीग्रेटेड निरोग क्लीनिक की गाइडलाइन, जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी नहीं थी। इसके कारण योजना के उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करने में परेशानी आ रही है।

शोध में यह सुझाव दिया गया है कि स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि वे योजना की प्रक्रिया और सेवाओं को बेहतर तरीके से लागू कर सकें। साथ ही, स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी संसाधनों और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है।

अध्ययन में शामिल लाभार्थियों से भी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जानकारी ली गई। इससे यह समझने की कोशिश की गई कि आम लोगों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं का कितना लाभ मिल रहा है और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई बार मरीजों को समय पर जांच और उपचार नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञों ने कहा कि गैर संचारी रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन केंद्रों पर नियमित जांच और बीमारी की शुरुआती पहचान की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।

अध्ययन ने हिमाचल की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर संकेत किया है। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने, मरीजों की नियमित निगरानी, जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने और योजना के प्रभावी मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।

राज्य में गैर संचारी रोगों का बढ़ता बोझ आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री निरोग योजना को प्रभावी तरीके से लागू करना और इसकी कमियों को दूर करना जरूरी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते हैं तो हृदय रोग, कैंसर, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अब स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि अध्ययन में सामने आई कमियों को दूर कर योजना को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाया जाए।

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