हिमाचल प्रदेश

ओलावृष्टि रोकने वाली गन पर HC सख्त हिमाचल में एक साल तक लगी रोक

Ratna Netam
5 Oct 2026 6:38 PM IST
ओलावृष्टि रोकने वाली गन पर HC सख्त हिमाचल में एक साल तक लगी रोक
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में इस्तेमाल की जा रही एंटी-हेल गन को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पूरे हिमाचल प्रदेश में एंटी-हेल गन के इस्तेमाल पर तत्काल और पूरी तरह से कम से कम एक साल के लिए रोक लगाई जाए। अदालत ने यह निर्देश बागवानों की ओर से जताई गई उन चिंताओं के बाद दिया, जिनमें इन गनों के इस्तेमाल से ज्यादा बारिश होने और आसपास के सेब के बागानों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। स्थानीय फल उत्पादकों की शिकायतों के बाद हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के बागवानी निदेशक की ओर से दाखिल हलफनामे का भी परीक्षण किया।
एक साल के लिए पूरी तरह रोक
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि एंटी-हेल गन के इस्तेमाल पर पूरे राज्य में तत्काल रोक लगाई जाए। यह रोक कम से कम एक साल तक लागू रखने को कहा गया है। अदालत के आदेश के बाद अब राज्य में ओलावृष्टि से बचाव के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इन गनों के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।एंटी-हेल गन का इस्तेमाल मुख्य रूप से ओलावृष्टि से फलों और फसलों को बचाने के उद्देश्य से किया जाता है। खासकर सेब उत्पादक क्षेत्रों में बागवान ओलों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इस तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल करते रहे हैं। हालांकि, अब इसके इस्तेमाल को लेकर पर्यावरण और आसपास के बागानों पर संभावित प्रभावों से जुड़े सवाल अदालत के सामने उठे हैं।
बागवानों की शिकायतों पर शुरू हुई सुनवाई
मामले की शुरुआत स्थानीय फल उत्पादकों की शिकायतों से हुई। बागवानों ने एंटी-हेल गन के इस्तेमाल के दौरान आसपास के इलाकों में अधिक बारिश होने और सेब के बागानों को नुकसान पहुंचने की चिंता जताई थी। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में सुनना शुरू किया।अदालत के सामने यह मुद्दा केवल एंटी-हेल गन के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके संचालन और बारिश के बीच संभावित संबंध से जुड़े तथ्यों पर भी विचार किया गया। कोर्ट ने इस संबंध में राज्य के बागवानी विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड और हलफनामे की जांच की।
हलफनामे में बारिश का उल्लेख
बागवानी निदेशक की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि जब भी एंटी-हेल सिस्टम को एक घंटे से अधिक समय तक चलाया गया, उस दौरान भारी और लंबे समय तक बारिश दर्ज की गई। अदालत ने इस जानकारी पर गौर किया।हलफनामे में दर्ज इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने बागवानों की ओर से जताई गई चिंताओं को प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होने वाला माना। अदालत ने एंटी-हेल गन के इस्तेमाल और इसके बाद दर्ज होने वाली बारिश से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इसके संचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
सेब उत्पादकों की चिंता बनी अहम आधार
हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य के कई इलाकों में बड़ी संख्या में बागवान सेब की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में मौसम में होने वाले बदलाव और अत्यधिक बारिश का फसल पर सीधा असर पड़ सकता है।बागवानों की ओर से अदालत में यह चिंता रखी गई थी कि एंटी-हेल गन के इस्तेमाल के दौरान आसपास के सेब बागानों में अधिक बारिश की स्थिति बन सकती है। लगातार या भारी बारिश होने से फल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी शिकायत को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग सामने आई थी।हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और बागवानी निदेशक के हलफनामे को ध्यान में रखा। इसके बाद अदालत ने राज्यभर में एंटी-हेल गन के इस्तेमाल को रोकने का आदेश दिया।
सरकार को तत्काल पालन के निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इसका मतलब है कि रोक केवल किसी एक जिले या बागवानी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में एंटी-हेल गन के इस्तेमाल पर लागू होगी।कम से कम एक साल की रोक के दौरान इस व्यवस्था से जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और कृषि संबंधी पहलुओं पर आगे अध्ययन या समीक्षा की गुंजाइश बनी रहेगी। हालांकि, इस अवधि के दौरान सरकार और संबंधित विभाग किस तरह वैकल्पिक व्यवस्था पर काम करेंगे, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
बागवानों और विभाग की नजर आगे की कार्रवाई पर
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब बागवानों और राज्य के बागवानी विभाग की नजर आगे की प्रक्रिया पर होगी। एंटी-हेल गन का उद्देश्य जहां ओलावृष्टि से फसल बचाना रहा है, वहीं इसके संभावित प्रभावों को लेकर उठे सवालों ने नई बहस शुरू कर दी है।अदालत ने फिलहाल उपलब्ध तथ्यों और बागवानों की शिकायतों को देखते हुए सावधानी बरतने का रास्ता अपनाया है। एक साल की रोक के दौरान इस विषय से जुड़े वैज्ञानिक और कृषि संबंधी पहलुओं का आकलन महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के चलते हिमाचल प्रदेश में एंटी-हेल गन के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लागू रहेगी।
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