हिमाचल प्रदेश

कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 397 दवाओं के घटे दाम

Ratna Netam
29 Oct 2026 9:44 PM IST
कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 397 दवाओं के घटे दाम
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शिमला : 29 अक्टूबर 2026। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती की गई है। भाजपा विधायक एवं हिमाचल प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने गुरुवार को शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि 543 कैंसर संबंधी दवा ब्रांडों और पैक आकारों में से 397 की अधिकतम खुदरा कीमतों में कमी दर्ज की गई है। कुछ दवाओं के दाम लगभग 93 प्रतिशत तक घटाए गए हैं। रणधीर शर्मा ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा का आभार व्यक्त किया।
27 अक्टूबर को जारी हुई संशोधित मूल्य सूची
भाजपा नेता रणधीर शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की ओर से 27 अक्टूबर को जारी संशोधित मूल्य सूची के अनुसार कैंसर संबंधी 543 दवा ब्रांडों और पैक आकारों की समीक्षा की गई।इनमें 397 की कीमतों में कटौती दर्ज की गई, जबकि अन्य की कीमतों में समान स्तर की कमी नहीं हुई।उन्होंने कहा कि महंगी दवाओं के कारण कैंसर मरीजों के परिवारों को लंबे समय से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई परिवार इलाज का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेने या अपनी संपत्ति बेचने तक को मजबूर हो जाते हैं।उनके अनुसार, दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ घटेगा।संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी।
40 हजार रुपये की दवा अब लगभग 2,700 रुपये में
रणधीर शर्मा ने दवाओं की कीमतों में कटौती के कुछ उदाहरण भी प्रस्तुत किए।उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर के कुछ प्रकारों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली पाल्बोसिक्लिब 125 मिलीग्राम दवा की कीमत पहले लगभग 40,421 रुपये थी, जो घटकर करीब 2,730 रुपये हो गई है।एनपीपीए की विस्तृत सूची के अनुसार, पाल्बोप्रो ब्रांड के 125 मिलीग्राम वाले 21 कैप्सूल के पैक की संशोधित कीमत 2,720 रुपये है। पहले इसकी अधिकतम खुदरा कीमत 40,421.33 रुपये थी।इसमें लगभग 93.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।इसी तरह पाल्बोसिक्लिब 100 मिलीग्राम के एक ब्रांड की कीमत 24,505 रुपये से घटकर लगभग 2,069 रुपये हुई है।कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली थायोटेपा 100 मिलीग्राम की एक वायल का मूल्य भी लगभग 80,072 रुपये से घटकर 7,150 रुपये हो गया है।
दवाओं की कीमतें कैसे कम हुईं?
केंद्र सरकार ने कैंसर की कुछ गैर-अनुसूचित दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित करने का निर्णय लिया है।इस व्यवस्था के तहत दवाओं की आपूर्ति और बिक्री के दौरान लिए जाने वाले व्यापारिक मार्जिन पर 30 प्रतिशत की सीमा निर्धारित की गई है।इसका उद्देश्य दवा निर्माता से लेकर मरीज तक पहुंचने की प्रक्रिया में कीमतों की अत्यधिक बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग ने 8 अक्टूबर को बताया था कि इस कदम से कैंसर मरीजों को सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।हालांकि, मरीज को होने वाली वास्तविक बचत निर्धारित दवा, उसके ब्रांड, खुराक और पहले से मिल रही छूट पर निर्भर करेगी।
सभी कैंसर दवाओं के दाम नहीं घटे
कीमतों में बड़ी कटौती के बावजूद सभी कैंसर दवाओं के मूल्य समान रूप से कम नहीं हुए हैं।रिपोर्टों के अनुसार, कुछ महंगे मूल ब्रांडों की कीमतें पहले जैसी बनी हुई हैं, जबकि उनके जेनेरिक या बायोसिमिलर विकल्पों की कीमतों में भारी कमी दर्ज की गई है।उदाहरण के लिए, कुछ इम्यूनोथेरेपी दवाओं और मूल निर्माता के महंगे ब्रांडों पर संशोधित मूल्य व्यवस्था का सीमित प्रभाव पड़ा है।स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और मरीज संगठनों का कहना है कि दवाओं की कीमतों में कटौती महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन कैंसर के संपूर्ण इलाज को सस्ता बनाने के लिए अन्य खर्चों पर भी ध्यान देना होगा।इनमें अस्पताल में भर्ती, जांच, रेडिएशन थेरेपी और अन्य उपचार संबंधी खर्च शामिल हैं।
हिमाचल को 320 अतिरिक्त मेडिकल पीजी सीटें
पत्रकार वार्ता के दौरान रणधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के लिए 320 अतिरिक्त सीटें स्वीकृत की हैं।इसके साथ ही लगभग 415 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।रणधीर शर्मा के अनुसार, इससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार केंद्र के सहयोग से संचालित योजनाओं का राजनीतिक श्रेय लेने का प्रयास कर रही है।
1,422 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजना पर सवाल
भाजपा नेता ने जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) की सहायता से संचालित लगभग 1,422 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य परियोजना की प्रगति पर भी सवाल उठाएउन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं ला पाई है।इसके अलावा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत क्रिटिकल केयर ब्लॉक और ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट के निर्माण में देरी का मुद्दा उठाया।रणधीर शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।ये आरोप भाजपा नेता के हैं और इन्हें राज्य सरकार की ओर से स्वीकार किए गए निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
521 करोड़ की स्वास्थ्य सहायता के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
रणधीर शर्मा ने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के लिए स्वीकृत लगभग 521 करोड़ रुपये का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया है।उन्होंने ऊना में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क परियोजना की प्रगति पर भी सवाल उठाए।भाजपा नेता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 225 करोड़ रुपये जारी किए जाने के बावजूद परियोजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही है।उनके अनुसार, औषधि उद्योग से जुड़ी परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।उन्होंने मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना से राज्य सरकार के हटने के फैसले की भी आलोचना की।
आपदा राहत राशि के उपयोग में पारदर्शिता की मांग
स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा रणधीर शर्मा ने आपदा पुनर्निर्माण कार्यों के लिए केंद्र से मिली आर्थिक सहायता का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने कहा कि पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के अंतर्गत लगभग 2,006 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की गई थी।शर्मा ने आरोप लगाया कि इस राशि से जुड़े कार्यों के आवंटन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं।उन्होंने परियोजनाओं के खर्च और वास्तविक प्रगति का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।इसके अलावा पंचायती राज संस्थाओं को वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान के उपयोग को लेकर भी राज्य सरकार की जवाबदेही तय करने की बात कही।
मरीजों तक पहुंचनी चाहिए सस्ती दवाओं का लाभ
कैंसर दवाओं की कीमतों में कटौती का वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुंचाने के लिए अस्पतालों और दवा विक्रेताओं को संशोधित मूल्य सूची लागू करनी होगी।नई कीमतें 9 नवंबर से प्रभावी होने के बाद मरीज एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट और फार्मा सही दाम ऐप पर दवाओं की कीमतों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।मरीजों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग ब्रांड और पैक आकारों की कीमतों में अंतर हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना कैंसर की निर्धारित दवा या खुराक बदलना उचित नहीं है।भाजपा नेता रणधीर शर्मा ने कैंसर की दवाओं के दाम घटाने के फैसले को मरीजों के लिए महत्वपूर्ण राहत बताया है। हालांकि, यह देखना भी जरूरी होगा कि संशोधित कीमतों का लाभ अस्पतालों और दवा दुकानों के माध्यम से मरीजों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचता है।
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