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हिमाचल प्रदेश
दिवाली से पहले सरकार अलर्ट, पटाखों को लेकर सख्त निर्देश
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 6:50 PM IST

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में दीपावली की तैयारियों के बीच बढ़ता वायु प्रदूषण चिंता का विषय बन गया है। पहाड़ी राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। सबसे अधिक चिंता सोलन जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बद्दी को लेकर सामने आई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 227 दर्ज किए जाने की जानकारी मिली है। इससे पहले 2 नवंबर को यहां एक्यूआई 200 बताया गया था। वहीं, सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में भी एक्यूआई 123 तक पहुंचने की सूचना है। त्योहार से पहले प्रदूषण का यह स्तर प्रशासन और आम लोगों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
बद्दी हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं। उद्योगों के अलावा भारी वाहनों की आवाजाही, निर्माण गतिविधियां और सड़कों से उड़ने वाली धूल भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में एक्यूआई का 200 के पार पहुंचना स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर संकेत माना जा रहा है।
भारतीय वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार, 201 से 300 के बीच एक्यूआई 'खराब' श्रेणी में आता है। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा अस्थमा और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।बद्दी में एक्यूआई 227 तक पहुंचने की सूचना ऐसे समय सामने आई है, जब दीपावली के कारण बाजारों में खरीदारी बढ़ रही है और वाहनों की आवाजाही में भी तेजी आने की संभावना है। त्योहार के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना सकता है।
हालांकि, बद्दी के अलग-अलग ऑनलाइन वायु गुणवत्ता प्लेटफॉर्म पर एक्यूआई के आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। इसलिए 227 के आंकड़े को किसी एक समय की रिपोर्ट के रूप में देखना जरूरी है। वायु गुणवत्ता का स्तर दिन के अलग-अलग समय पर मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।पांवटा साहिब में एक्यूआई 123 दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। भारतीय मानकों के अनुसार यह स्तर 'मध्यम' श्रेणी में आता है। हालांकि, यह बद्दी की तुलना में बेहतर स्थिति है, लेकिन संवेदनशील लोगों को इस स्तर पर भी परेशानी हो सकती है।
प्रदूषण की बढ़ती आशंका को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिला प्रशासनों ने दीपावली पर पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य त्योहार के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित रखना है।शिमला जिला प्रशासन ने दीपावली पर पटाखे चलाने का समय सीमित किया है। जारी आदेश के अनुसार, 8 नवंबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक ही आतिशबाजी की अनुमति होगी। इसके अलावा केवल ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लोगों से निर्धारित समय का पालन करने की अपील की है।
कांगड़ा जिले में भी दीपावली और अन्य आगामी त्योहारों को लेकर नियम तय किए गए हैं। यहां भी दीपावली पर रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे चलाने की अनुमति है। इसके साथ पटाखों की बिक्री के लिए प्रशासन से अनुमति लेना आवश्यक किया गया है।
कांगड़ा प्रशासन ने पटाखों की दुकानें केवल निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर लगाने के निर्देश दिए हैं। दुकानों में अग्निशमन उपकरण, रेत से भरी बाल्टियां और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। बाजारों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और शांत क्षेत्रों के आसपास आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया गया है।वहीं, पांवटा साहिब में पटाखों की बिक्री के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। स्थानीय प्रशासन ने अस्थायी लाइसेंस जारी करने और पटाखा दुकानों के लिए निर्धारित स्थान तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे अनधिकृत बिक्री को रोकने और अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की निगरानी करता है। बद्दी, नालागढ़, परवाणू, कालाअंब और पांवटा साहिब जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति पर विशेष नजर रखना जरूरी है। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर वायु गुणवत्ता से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों की शुरुआत के दौरान कई स्थानों पर हवा की गति कम होने और तापमान में बदलाव के कारण प्रदूषक कण वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में उद्योगों, वाहनों और पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
वायु प्रदूषण में PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। PM2.5 के बेहद छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब एक्यूआई खराब श्रेणी में हो, तब अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर रहने से बचना चाहिए। सांस के मरीजों को अपनी नियमित दवाइयां जारी रखनी चाहिए और किसी तरह की परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण अधिक होने पर खुले में दौड़ने या भारी शारीरिक गतिविधियों को सीमित करना उपयोगी हो सकता है। घर के आसपास कचरा या पत्तियां जलाने से भी बचना चाहिए।
दीपावली के अवसर पर पटाखों का इस्तेमाल सीमित करने के साथ वाहनों से निकलने वाले धुएं और औद्योगिक उत्सर्जन पर भी नियंत्रण जरूरी है। केवल पटाखों पर पाबंदियां लगाना पर्याप्त नहीं होगा। प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए नियमित निगरानी, नियमों का पालन और लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जानकारों का मानना है कि त्योहारों को उत्साह और जिम्मेदारी के साथ मनाया जा सकता है। सजावट, रोशनी और पारिवारिक कार्यक्रमों के जरिए दीपावली का आनंद लिया जा सकता है, जबकि अनावश्यक आतिशबाजी से बचकर प्रदूषण कम करने में योगदान दिया जा सकता है।
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