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- गोंबो रंगजोन बना नया...

लाहौल-स्पीति। हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी को लद्दाख की जांस्कर घाटी से जोड़ने वाले शिंकुला दर्रे के मार्ग पर स्थित गोंबो रंगजोन पर्वत इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बन रहा है। अपनी अनोखी आकृति, विशाल चट्टानी संरचना और चारों ओर फैले ऊंचे हिमालयी भू-दृश्य के कारण यह पर्वत देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित कर रहा है। स्थानीय लोगों के साथ बाइक सवार और प्रकृति प्रेमी भी बड़ी संख्या में इस क्षेत्र का रुख कर रहे हैं।
समुद्र तल से लगभग 16,580 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिंकुला दर्रा सामरिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के दारचा क्षेत्र को जांस्कर घाटी से जोड़ता है। दुर्गम पहाड़ी मार्ग और ऊंचाई के बावजूद यहां पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। इसी रास्ते पर आगे बढ़ने पर गोंबो रंगजोन का विशाल और आकर्षक स्वरूप दिखाई देता है।
गोंबो रंगजोन एक अलग खड़ी विशाल चट्टानी चोटी है। आसपास की खुली घाटी के बीच इसका स्वरूप दूर से ही दिखाई देने लगता है। जैसे-जैसे पर्यटक इसके करीब पहुंचते हैं इसकी विशालता और बनावट उन्हें रोमांचित करती है। सूर्य की रोशनी के अनुसार पर्वत का रंग और दृश्य बदलता दिखाई देता है जिससे फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह विशेष स्थान बन गया है।
पर्यटकों के बीच इस पर्वत की आकृति को लेकर अलग-अलग धारणाएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे भगवान शिव के सिंहासन जैसी आकृति से जोड़ते हैं। हालांकि स्थानीय जांस्करी बौद्ध परंपरा में गोंबो रंगजोन को महाकाल या संरक्षक देवता से जुड़ा पवित्र पर्वत माना जाता है। उपलब्ध पर्यटन जानकारी के अनुसार यह जांस्कर के लुंगनाक क्षेत्र में कारग्याक गांव के दक्षिण में स्थित है और स्थानीय समुदाय के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है। गोंबो रंगजोन यात्रा विवरण
शिंकुला मार्ग खुलने और सड़क संपर्क में सुधार के बाद इस क्षेत्र तक पहुंच अपेक्षाकृत आसान हुई है। पहले गोंबो रंगजोन तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को लद्दाख की ओर से लंबी यात्रा करनी पड़ती थी। अब मनाली से अटल सुरंग होते हुए केलांग, जिस्पा और दारचा पहुंचकर शिंकुला के रास्ते जांस्कर की ओर जाया जा सकता है।
यह मार्ग रोमांच से भरपूर होने के साथ चुनौतीपूर्ण भी है। ऊंचाई बढ़ने के साथ पेड़-पौधे कम होते जाते हैं और भू-दृश्य पथरीले पर्वतों में बदल जाता है। रास्ते में मौसम तेजी से बदल सकता है। बर्फबारी, बारिश, भूस्खलन और जलधाराओं के कारण यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। इसलिए यात्रा से पहले प्रशासन और सीमा सड़क संगठन से मार्ग की ताजा स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है।
गोंबो रंगजोन पहुंचने वाले पर्यटक पर्वत के सामने कुछ समय बिताने, फोटोग्राफी करने और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव लेने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं। साफ मौसम में नीले आसमान के नीचे खड़ा पर्वत बेहद आकर्षक दिखाई देता है। रात में प्रकाश प्रदूषण कम होने के कारण तारों को देखने और खगोलीय फोटोग्राफी के लिए भी यह क्षेत्र उपयुक्त माना जाता है।
बाइक और चार पहिया वाहनों से जांस्कर की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए गोंबो रंगजोन प्रमुख पड़ाव बन रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच इस स्थान को लेकर उत्सुकता बढ़ी है। कई यात्री इसे अपनी जांस्कर यात्रा का सबसे यादगार दृश्य बताते हैं।
पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से लाहौल और जांस्कर क्षेत्र में स्थानीय रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। होमस्टे, होटल, भोजनालय, टैक्सी सेवा, स्थानीय गाइड और कैंपिंग से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की बिक्री को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही अनियंत्रित पर्यटन से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। यह पूरा क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी का हिस्सा है। प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट और अन्य कचरा यहां लंबे समय तक पड़ा रह सकता है। पर्यटकों को अपना कचरा वापस लेकर जाना चाहिए और प्राकृतिक क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए।
गोंबो रंगजोन स्थानीय लोगों के लिए केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि पवित्र स्थान है। इसलिए पर्यटकों को यहां की धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय निर्देशों का सम्मान करना चाहिए। पर्वत के आसपास मौजूद प्रार्थना स्थलों और मणि पत्थरों से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने या स्थानीय लोगों की तस्वीर लेने से भी बचना चाहिए।
अत्यधिक ऊंचाई के कारण यहां ऑक्सीजन का स्तर कम रहता है। पर्यटकों को सीधे मैदानी क्षेत्र से शिंकुला जाने के बजाय लाहौल में रुककर शरीर को ऊंचाई के अनुकूल बनाना चाहिए। सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, थकान और सांस लेने में परेशानी ऊंचाई से जुड़ी बीमारी के संकेत हो सकते हैं। लक्षण बढ़ने पर तत्काल कम ऊंचाई वाले स्थान की ओर लौटना सुरक्षित रहता है।
यात्रा के लिए वाहन का अच्छी स्थिति में होना भी जरूरी है। मार्ग के कई हिस्से कच्चे, संकरे और पथरीले हो सकते हैं। अनुभवी चालक और अधिक ग्राउंड क्लीयरेंस वाले वाहन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पर्याप्त ईंधन, भोजन, पानी, गर्म कपड़े और प्राथमिक उपचार सामग्री साथ रखना आवश्यक है।
शिंकुला मार्ग और प्रस्तावित सुरंग परियोजना भविष्य में लाहौल तथा जांस्कर के बीच संपर्क को और मजबूत कर सकती है। संपर्क बेहतर होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को स्वच्छता, शौचालय, पार्किंग, आपात चिकित्सा और नियंत्रित पर्यटन से जुड़ी व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी।
गोंबो रंगजोन की लोकप्रियता हिमालय के अपेक्षाकृत कम चर्चित पर्यटन स्थलों के प्रति बढ़ती रुचि का उदाहरण है। शांत वातावरण और अद्भुत प्राकृतिक स्वरूप इसे खास बनाते हैं। जिम्मेदार पर्यटन अपनाया जाए तो यह क्षेत्र स्थानीय आजीविका बढ़ाने के साथ लंबे समय तक अपनी प्राकृतिक और आध्यात्मिक पहचान सुरक्षित रख सकता है।





