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हिमाचल प्रदेश
पोंग बांध के प्रतिबंधित क्षेत्र से दूर रहें मछुआरे, निर्देश जारी
Kiran
10 Oct 2026 1:53 PM IST

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Nurpur निचले कांगड़ा में पोंग डैम (जिसे महाराणा प्रताप सागर भी कहा जाता है) के प्रतिबंधित इलाके—जिसमें डैम रिज़र्वॉयर का दाहिना बैरियर और रिज़र्व ज़ोन शामिल है—में मछली पकड़ने वाली नावों की कथित आवाजाही और जाल बिछाने की घटनाओं ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। 30 सितंबर को, पोंग रिज़र्वॉयर के मत्स्य विभाग ने खतियाड़ मत्स्य सहकारी समिति के अध्यक्ष और सचिव को लिखित निर्देश जारी किए। इसमें उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि समिति से जुड़े मछुआरे डैम के 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्रतिबंधित इलाके में प्रवेश न करें।
विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित इलाके में मछली पकड़ने पर जाल, नावें और पकड़ी गई मछलियां ज़ब्त की जा सकती हैं, साथ ही मछली पकड़ने का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। रिज़र्वॉयर प्रबंधन, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और पोंग डैम सुरक्षा पुलिस भी नियमों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि मछुआरे 'नो-बोटिंग' और 'नो-फिशिंग' ज़ोन में घुसकर जाल बिछा रहे थे, खासकर शाम और रात के समय। इस गतिविधि ने संवेदनशील इलाके में निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां डैम की सुरक्षा के हित में अनधिकृत आवाजाही प्रतिबंधित है। BBMB और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और अनधिकृत आवाजाही के खिलाफ निगरानी व कार्रवाई बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
पोंग डैम डिवीज़न के मत्स्य उप-निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर ये लिखित निर्देश जारी किए गए। उन्होंने कहा कि इलाके में तैनात पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के पास सुरक्षा के नज़रिए से कार्रवाई करने का अधिकार है, जबकि मत्स्य विभाग मछली पकड़ने के नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करेगा। BBMB के मुख्य अभियंता राकेश गुप्ता ने कहा कि रिज़र्वॉयर के प्रतिबंधित इलाके में किसी भी गतिविधि के खिलाफ उचित कदम उठाए जा रहे हैं और सुरक्षा संबंधी किसी भी खतरे से निपटने के लिए ज़रूरी उपाय किए जा रहे हैं।
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