हिमाचल प्रदेश

मौसमी प्रतिबंध हटते ही हिमाचल के जलाशयों में बढ़ी मछलियों की उपलब्धता

Kavita2
25 Aug 2026 11:55 AM IST
मौसमी प्रतिबंध हटते ही हिमाचल के जलाशयों में बढ़ी मछलियों की उपलब्धता
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में मछली पकड़ने पर लगाए गए दो महीने के मौसमी प्रतिबंध के समाप्त होने के बाद राज्य के बड़े जलाशयों में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रतिबंध हटने के बाद महज एक सप्ताह में पांच प्रमुख जलाशयों से 110 मीट्रिक टन से अधिक मछलियां पकड़ी गई हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 75 मीट्रिक टन था। यानी इस बार शुरुआती सप्ताह में मछली उत्पादन में 35 मीट्रिक टन से अधिक और करीब 46.67 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

मत्स्य पालन निदेशक ओम कांत ठाकुर ने सोमवार को बिलासपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को मौसमी प्रतिबंध हटने के बाद जलाशयों में मछली पकड़ने का काम शुरू हुआ और पहले ही सप्ताह में मिले आंकड़े उत्साहजनक हैं।

पहले ही दिन 46 मीट्रिक टन मछली

मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, प्रतिबंध हटने के पहले ही दिन मछुआरों ने करीब 46 मीट्रिक टन मछलियां पकड़ीं। इसके बाद पूरे सप्ताह भी मछली पकड़ने का काम तेजी से जारी रहा।

विभाग का कहना है कि शुरुआती आंकड़े राज्य के जलाशयों में मछलियों की अच्छी उपलब्धता का संकेत देते हैं। मौसमी प्रतिबंध के दौरान मछलियों को प्रजनन और प्राकृतिक वृद्धि के लिए समय मिलता है। प्रतिबंध हटने के बाद बड़ी मात्रा में मछलियों की उपलब्धता से मछुआरों को भी बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी है।

पोंग डैम और गोविंद सागर में सबसे अधिक उत्पादन

इस वर्ष प्रतिबंध हटने के बाद सबसे ज्यादा मछलियां पोंग डैम और गोविंद सागर झील से पकड़ी गई हैं। ओम कांत ठाकुर के मुताबिक, पोंग डैम से करीब 51 मीट्रिक टन मछलियां पकड़ी गईं।

वहीं, गोविंद सागर झील से 50 मीट्रिक टन से अधिक मछलियों की पकड़ दर्ज की गई। इन दोनों जलाशयों का कुल योगदान शुरुआती सप्ताह के उत्पादन में सबसे बड़ा रहा।

इसके अलावा रंजीत सागर जलाशय से करीब 7.5 मीट्रिक टन मछलियां पकड़ी गईं। चमेरा और कोल डैम से मिलाकर लगभग एक मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य के बड़े जलाशयों में मछली संसाधनों की उपलब्धता अच्छी बनी हुई है।

पिछले साल के मुकाबले 46.67 फीसदी बढ़ोतरी

मत्स्य पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष इसी अवधि में पांच प्रमुख जलाशयों से करीब 75 मीट्रिक टन मछलियां पकड़ी गई थीं। इस वर्ष यह आंकड़ा 110 मीट्रिक टन से अधिक हो गया है।

इस तरह करीब 35 मीट्रिक टन की अतिरिक्त मछली पकड़ दर्ज हुई है। प्रतिशत के लिहाज से यह वृद्धि 46.67 फीसदी से अधिक बैठती है।

विभाग के लिए यह वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मछली पालन से जुड़े लोगों की आय सीधे तौर पर जलाशयों में मछलियों की उपलब्धता और पकड़ पर निर्भर करती है। बेहतर उत्पादन का अर्थ मछुआरों को अधिक काम और संभावित रूप से बेहतर आमदनी मिलना है।

दो महीने का प्रतिबंध क्यों लगाया जाता है

राज्य में मछली पकड़ने पर मौसमी प्रतिबंध मुख्य रूप से मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लगाया जाता है। इस अवधि में मछलियों को प्रजनन और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिलता है।

मत्स्य पालन विभाग के लिए यह प्रतिबंध जलाशयों में मछली संसाधनों को बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। प्रजनन अवधि में मछली पकड़ने पर रोक से छोटी और प्रजनन योग्य मछलियों को संरक्षण मिलता है।

प्रतिबंध समाप्त होने के बाद मछुआरों को दोबारा जलाशयों में मछली पकड़ने की अनुमति दी जाती है। इस बार पहले सप्ताह में ही उत्पादन में आई तेजी को विभाग जलाशयों में मछलियों की अच्छी उपलब्धता से जोड़कर देख रहा है।

मछुआरों के लिए उम्मीद बढ़ी

मछली उत्पादन में बढ़ोतरी से जलाशयों पर निर्भर मछुआरों में भी उम्मीद बढ़ी है। दो महीने तक प्रतिबंध के कारण मछली पकड़ने का काम बंद रहने के बाद अब उन्हें अच्छी पकड़ मिल रही है।

विशेष रूप से पोंग डैम और गोविंद सागर झील में बड़ी मात्रा में मछली मिलने से स्थानीय मछुआरा समुदाय को लाभ मिलने की संभावना है। लगातार अच्छी पकड़ बनी रहती है तो आने वाले दिनों में बाजार में मछली की आपूर्ति भी बेहतर हो सकती है।

विभाग रखेगा उत्पादन पर नजर

मत्स्य पालन विभाग अब आने वाले सप्ताहों में भी जलाशयों से होने वाली मछली पकड़ की निगरानी करेगा। शुरुआती सप्ताह के आंकड़े सकारात्मक हैं, लेकिन पूरे सीजन की स्थिति का आकलन लंबे समय के उत्पादन के आधार पर किया जाएगा।

विभाग का प्रयास है कि जलाशयों में मछली संसाधनों का संतुलन बना रहे और मछुआरों को भी पर्याप्त अवसर मिले। इसके लिए प्रजनन काल में प्रतिबंध और बाकी अवधि में नियंत्रित मछली पकड़ जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ रोजगार भी

हिमाचल के बड़े जलाशय न केवल जल संसाधन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यहां मछली पालन और इससे जुड़े रोजगार का भी बड़ा आधार हैं। हजारों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी है।

ऐसे में मछलियों की संख्या में बढ़ोतरी पर्यावरणीय दृष्टि से सकारात्मक संकेत होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, लंबे समय तक उत्पादन बनाए रखने के लिए मछली संसाधनों का टिकाऊ इस्तेमाल जरूरी होगा।

फिलहाल 15 अगस्त को प्रतिबंध हटने के बाद पहले सप्ताह में 110 मीट्रिक टन से अधिक मछली उत्पादन ने मत्स्य पालन विभाग और मछुआरों दोनों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। पिछले वर्ष की तुलना में करीब 46.67 फीसदी की बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि दो महीने के मौसमी प्रतिबंध के बाद जलाशयों में मछलियों की उपलब्धता बेहतर रही है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में यह उत्पादन स्तर कितना कायम रहता है।

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